हाल के वर्षों में अमेरिका ने पाकिस्तान से दूरी बढ़ाई है, लेकिन उस खाली जगह को भरने के लिए चीन आगे आ गया

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चीन और पाकिस्तान की बीते कुछ सालों से बढ़ती दोस्ती भारत के लिए चिंता का सबब बनी हुई है। एक वक्त था जब पाकिस्तान अमेरिका के काफी करीब था। तब उसे अमेरिका से हथियार, पैसा सब कुछ मिल रहा था। लेकिन अब यह बीते दिनों की बात हो चुकी है। अमेरिका अच्छी तरह समझ गया है कि दुनियाभर में आतंकवाद के खिलाफ उसके अभियान के समर्थन में पाकिस्तान चाहे जितनी बड़ी-बड़ी बातें करता हो, लेकिन असल में वह खतरनाक आतंकवादियों का महफूज ठिकाना है। भारत को दबाव में रखने और कई दूसरे मकसद साधने के लिए ये जिहादी कभी अमेरिका के लाडले हुआ करते थे। अब अमेरिका के अफगानिस्तान से हटने के बाद पाकिस्तान तालिबान के साथ भी अपने रिश्ते मजबूत करने में लगा हुआ है। यह सब देखकर अमेरिका ने उससे मुंह फेर लिया है। इससे अचानक जो जगह खाली हुई है, उसमें चीन घुस आया है। इन दोनों ही देशों का साझा दुश्मन है भारत। अमेरिका ने पाकिस्तान को हथियार देने बंद किए, तो अब चीन उसे हथियार दे रहा है।

अभी पाकिस्तान को चीन से होवित्जर तोपें और मल्टी-बैरल रॉकेट मिले हैं। भारत की इस पर कड़ी नजर है। नजर रखने के सिवा उपाय भी क्या है! चीन में बनी यह नई तोप दुश्मन पर तेजी से हमला करने में सक्षम है। इस तोप को टैंक की चेसिस पर तैयार किया गया है। यानी, इसे एक से दूसरी जगह आसानी से ले जाया जा सकता है। चीन की सरकारी हथियार निर्माता कंपनी नॉर्निको ने पाकिस्तान को एआर-1 300 एमएम मल्टी-बैरल रॉकेट दिए हैं। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह हथियार भारत के पास मौजूद पिनाक रॉकेट लॉन्चर को चैलेंज कर सकता है। यही करने के लिए तो चीन ने उसे यह हथियार दिया है।

यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान को इस तरह के हथियार मिले हैं। चीन और पाकिस्तान के बीच 51 करोड़ अमेरिकी डॉलर की डील हुई है। इधर, चीन ने भारत की सीमा पर अपने फौजी जमावड़े में भारी बढ़ोतरी कर दी है। हाइपरसोनिक मिसाइल से लेकर एस-400 जैसे अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम तक को उसने तैनात कर रखा है। भारत की पश्चिमी सीमा पर भी दबाव बढ़ाने लिए उसने पाकिस्तान को घातक हथियार दिए हैं। चीन से मिले इन नए खतरनाक हथियारों को पाकिस्तान कहां तैनात करेगा, इस बारे में कोई पुख्ता जानकारी तो नहीं है, लेकिन यह अंदाज़ा लगाना कठिन नहीं है कि इन हथियारों को किस मकसद से खरीदा गया है।


चीन अक्सर पाकिस्तान की तरह-तरह से सहायता करता रहता है। हाल में इसमें और इजाफा हुआ है। साल 1990 में चीन ने पाकिस्तान की परमाणु शक्ति बनने में मदद की थी। चीन और पाकिस्तान के बीच 2019 में एक समझौता हुआ था। उसमें ही यह तय हुआ कि चीन पाकिस्तान को एआर-1 रॉकेट लॉन्चर सिस्टम और होवित्जर तोपें देगा। इसके अलावा, इस समझौते के मुताबिक़ चीन पाकिस्तान को काफी दूर मौजूद दुश्मन को निशाना बनाने की तकनीक से भी लैस करेगा। तकनीक देने का मतलब है कि इस तरह के कारतूस पाकिस्तान खुद तैयार कर पाएगा।

चीन कई तरह से पाकिस्तान को ताकतवर बनाना चाहता है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि चीन पाकिस्तान को मजबूत बनाकर भारत को उसकी पश्चिमी सीमा पर उलझाए रखना चाहता है। यह भी पता चला है कि चीन ने पाकिस्तान को डीएफ-17 हाइपरसोनिक मिसाइल तक दी है। इस मिसाइल को भारत के एस-400 जैसे मिसाइल डिफेंस सिस्टम डिटेक्ट नहीं कर पाएंगे। यह मिसाइल एक हजार 950 किलोमीटर की दूरी तक मार कर सकती है। यही नहीं, यह आवाज की रफ्तार से पांच गुना ज्यादा स्पीड से दुश्मन के ठिकाने पर पहुंचती है। इस मिसाइल की रेंज में उत्तर भारत का अधिकांश हिस्सा होने से भारत के लिए चिंता होना स्वाभाविक है।

अभी कुछ दिनों पहले 26 जनवरी की सुबह राजपथ पर भारत ने पूरी दुनिया के सामने अपनी सामरिक शक्ति का प्रदर्शन किया। के-9 वज्र टैंक से लेकर पिनाक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम तक को दुनिया ने देखा। इस शक्ति प्रदर्शन से चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकार कहते हैं कि पाकिस्तान का गिरा हुआ मनोबल बढ़ाने के लिए ही चीन ने उसे और शक्तिशाली हथियार देने की पहल की है।

आवाज़ : रोहित उपाध्याय
बांग्ला से हिंदी अनुवाद : सरोजनी बिष्ट

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