शिल्पा शेट्टी-रिचर्ड गियर किसिंग केस: रिचर्ड गेयर ने साल 2007 में एक इवेंट के दौरान शिल्पा शेट्टी के गाल पर किस किया था। कुछ लोगों को लगा कि यह भारतीय संस्कृति का अपमान है और इस चक्कर में लंबी अदालती कार्यवाही चल गई। अब जाकर शिल्पा बरी हो सकी हैं

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हॉलिवुड अभिनेता रिचर्ड गेयर ने 14 साल नौ महीने पहले अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के गाल पर किस किया था। इस मामले में अब जाकर फैसला आया है। मुंबई की एक अदालत ने इस महीने की शुरुआत में जो निर्णय सुनाया, उसमें शिल्पा को किसी भी तरह के ग़लत काम से बरी कर दिया गया। इस फैसले को किस पर मज़ाक़ कहा जाए- शिल्पा पर, न्याय व्यवस्था या फिर हम भारतीयों पर?

इस फैसले को भारत में लॉ स्टूडेंट्स के लिए एक केस स्टडी बन जाना चाहिए। भारतीय अदालतों में जो प्रैक्टिस करना चाहते हैं, उनके लिए इसमें तीन पॉइंट हैं। पहला पॉइंट यही निकलता है कि भारत में क़ानूनी कार्यवाही कितनी धीमी गति से आगे बढ़ती है। दूसरी चीज़ है, ऐसे केस की तलाश कैसे करें, जिसमें कोई सिलेब्रिटी फंसता दिखे। और तीसरा बिंदु है, ओछे किस्म की मुकदमेबाजी करना और उसे बढ़ावा देना।

रिचर्ड गेयर और शिल्पा शेट्टी का यह वाकया 15 अप्रैल 2007 का है। इस मामले में दोनों के ख़िलाफ़ तीन केस दर्ज कराए गए थे। दो राजस्थान और एक यूपी में। इस साल 18 जनवरी को मुंबई में बैलार्ड पियर मेट्रोपॉलिटन कोर्ट के मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट ने शिल्पा को बरी कर दिया। साथ ही ऑब्जर्वेशन दिया कि शिल्पा ख़ुद पीड़ित लग रही हैं। कोर्ट के ऑर्डर में लिखा है, 'शिकायत में किसी भी कथित अपराध का एक भी तत्व संतुष्ट नहीं हो रहा है। इसके अलावा, अंतिम रिपोर्ट के साथ संलग्न कोई भी काग़ज़ात वर्तमान आरोपी के कृत्य का खुलासा नहीं करता ताकि उसे आईपीसी की धारा 34 (सामान्य इरादे) के दायरे में लाया जा सके।'

लेकिन, ध्यान रहे कि मामला अभी ख़त्म नहीं हुआ है। शिल्पा शेट्टी के ख़िलाफ़ दो और केस लंबित हैं। और यह तब है, जब सुप्रीम कोर्ट की एक डिविजन बेंच यह कहते हुए रिचर्ड गेयर के पक्ष में फैसला सुना चुकी है कि केस विचार करने योग्य नहीं है और इसे केवल पब्लिसिटी के लिए फाइल किया गया है।

इस केस में हालांकि कुछ देरी इस वजह से भी हुई, क्योंकि शिल्पा शेट्टी ने तीनों मामलों को मुंबई ट्रांसफर करने की दरख्वास्त दी थी। राजस्थान और यूपी की अदालतों में काग़ज़ी कार्रवाई पूरी होने में 6 साल लग गए। फिर भी उस मामले के लिए यह बहुत लंबा समय है, जिसे देश की सर्वोच्च अदालत बेकार कह चुकी है। यहां एक महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या अदालतों का समय खराब करने और शिल्पा शेट्टी को परेशान करने के लिए मुकदमा करने वालों से हर्जाना नहीं वसूलना चाहिए? क्या हम ऐसे लोगों को यूं ही छोड़कर बेकार की मुकदमेबाजी और पब्लिसिटी के लिए कोर्ट का इस्तेमाल करने को प्रोत्साहन नहीं दे रहे? यहां याद रखिए कि रिचर्ड गेयर और शिल्पा शेट्टी का वाकया पहला नहीं है। इससे पहले मिलिंद सोमण और मधु सप्रे के विज्ञापन, पूजा भट्ट की फिल्म रोग के पोस्टर और अक्षय कुमार के 'लाइव अनबॉटन्ड' को लेकर विवाद खड़ा किया जा चुका है।

शिल्पा और गेर वाला मामला 16 अप्रैल 2007 को शुरू हुआ था। दिल्ली में पिछली रात हुए एक कार्यक्रम की विडियो क्लिपिंग कुछ न्यूज़ चैनलों पर चलाई गईं और देश के कुछ हिस्सों में हंगामा शुरू हो गया। क्लिप में दिखाया गया कि गेयर ने पहले शिल्पा के हाथ चूमे। इस दौरान बॉलिवुड अभिनेत्री ने वहां मौजूद लोगों से कहा कि वे एड्स जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आए गेयर का धन्यवाद करें। इस बीच गेयर ने शिल्पा को पहले गले लगाया और फिर गाल पर किस किया। न्यूज़ क्लिपिंग में इसके बाद गेयर की एक मूवी के कुछ किस सीन दिखाए गए।

वह कार्यक्रम ट्रक ड्राइवरों को कंडोम का इस्तेमाल करने और एड्स से बचने के लिए प्रोत्साहित करने के बारे में था। वहां करीब चार हज़ार ट्रक ड्राइवर मौजूद थे। बॉलिवुड के एक और स्टार सनी देओल भी उपस्थित थे वहां। सनी ने एक फिल्म में ट्रक ड्राइवर का किरदार निभाया था। इतने लोगों के बीच में से किसी ने भी गेयर के व्यवहार पर गुस्सा नहीं जताया। शिल्पा ने हंसते हुए कहा था, 'यह थोड़ा ज़्यादा हो गया'। लेकिन दूर-दराज के शहरों में टीवी स्क्रीन पर यह दृश्य देख रहे लोग नाराज हो गए। गेयर और शिल्पा के पुतले जलाए गए। किसी ने कहा कि शिल्पा शेट्टी को मार देना चाहिए। मंच पर जो हुआ, उसे भारत के सांस्कृतिक मूल्यों पर हमला बताया गया। राजस्थान के एक वकील को तो यकीन ही नहीं हुआ कि शिल्पा ने गेयर का विरोध नहीं किया।

Richard gere shilpa

राजस्थान में एक अतरिक्त न्यायिक मैजिस्ट्रेट दिनेश चंद गुप्ता को घटना की क्लिपिंग दिखाई गई। जज ने अदालत के सामने उपस्थित होने के लिए शिल्पा को समन जारी कर दिया। भारतीय मूल्यों को बदनाम करने के लिए जज ने गेयर के ख़िलाफ़ भी अरेस्ट वॉरंट जारी कर दिया। दोनों ऐक्टर्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कार्यवाही पर रोक लगा दी। शिल्पा शेट्टी ने गुहार लगाई कि सारे मामलों को मुंबई की अदालत में शिफ्ट किया जाए। शिल्पा की क़ानूनी टीम की ओर से काग़ज़ात को लेकर कुछ देरी हुई। लेकिन आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2011 में सभी मामलों को मुंबई स्थानांतरित करने का आदेश पारित किया। साथ ही निर्देश दिया कि मुख्य मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट या तो ख़ुद मामले की सुनवाई करें या इसे किसी अन्य मैजिस्ट्रेट को सौंपें।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में हालांकि एक बात नोट थी। दरअसल, एक शिकायतकर्ता शीर्ष अदालत के समझ हाजिर नहीं हुआ था। करीब दो साल बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और केस ट्रांसफर करने पर रोक लगाने की मांग की। अगस्त 2013 में कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी और इस तरह मुंबई में सुनवाई का रास्ता साफ़ हुआ। इन सबमें ही साढ़े 6 साल बीत गए। मुंबई में साल 2017 में केस बैलार्ड पियर कोर्ट को सौंपा गया। इसके तुरंत बाद शिल्पा के वकील मधुकर दलवी ने दो मामलों में आरोप मुक्त करने के लिए एक आवेदन दायर किया। और अब जाकर फैसला आ सका है।

शिल्पा और गेयर एपिसोड से बहुत पहले मिलिंद सोमण और मधु सप्रे मामले ने तूल पकड़ा था। दोनों ने एक जूते के लिए विज्ञापन किया। उस ऐड में दोनों ने केवल जूते ही पहन रखे थे और शरीर पर अजगर लिपटा हुआ था। अब इस सीन को आप कुछ भी कह सकते हैं- कलात्मक, भद्दा या फिर अपमानजनक। लेकिन क्या यह कुछ ऐसा था, जिसके लिए दोनों मॉडल कोर्ट के प्रति जवाबदेह हों? नहीं न! एक अदालत ने यही फैसला दिया। संयोग से इस केस में भी नतीजे तक पहुंचने में 14 साल लग गए। विज्ञापन अगस्त 1995 में रिलीज हुआ था। नवंबर 2009 में जाकर दोनों मॉडल और एड से जुड़े कुछ दूसरे लोग केस में बरी हो सके।

इसी तरह फिल्म रोग के एक पोस्टर के मामले में पूजा भट्ट को केस ख़त्म करने में सात साल लगे। पोस्टर में अभिनेत्री को बेहद कम कपड़ों में दिखाया गया था। पूजा के ख़िलाफ़ एक एक्टिविस्ट और एक प्रफेसर ने साल 2005 में अश्लीलता के मामले में केस दर्ज कराए। एक्टिविस्ट वाले मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिसंबर 2012 में पूजा भट्ट को बरी कर दिया। दूसरा वाला केस साल 2019 तक चला था। लॉकडाउन और बंदिशों के बीच इस मामले में क्या हुआ, अभी जानकारी नहीं है।

अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना भी ऐसे केस का सामना कर चुकी हैं। मार्च 2009 की बात है। उनके पति अक्षय कुमार कपड़ों के एक नए ब्रैंड के लिए मॉडलिंग कर रहे थे। अक्षय रैंप पर वॉक करते हुए आते हैं और दर्शकों के बीच जहां ट्विंकल बैठी थीं, वहां रुक जाते हैं। वह ट्विंकल से जींस के बटन खोलने के लिए कहते हैं। ट्विंकल पहले थोड़ा हिचकती हैं, लेकिन फिर जींस का ऊपरी बटन खोल देती हैं। शिल्पा-गेयर केस की तरह यहां भी अगले दिन न्यूज़ चैनल्स पर यही विडियो चलता रहा। मुंबई के एक एक्टिविस्ट ने अक्षय, ट्विंकल और कार्यक्रम के आयोजकों पर केस दर्ज करने के लिए मुंबई पुलिस को लिखा। ट्विंकल गिरफ्तार हुईं और फिर जमानत मिल गई। आयोजकों को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत मिली। जुलाई 2013 में जाकर यह मामला खारिज हुआ।

आवाज़ : रोहित उपाध्याय


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