डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही फिल्म 'कट पुतली' में क्या खास है? अक्षय कुमार की यह फिल्म क्या दर्शकों को पसंद आएगी? नेटफ्लिक्स पर आया 'फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलिवुड वाइव्स' का दूसरा सीजन कैसा है? साथ ही जानिए सोनी लिव की 'सुंदरी गार्डन', एमेजॉन प्राइम विडियो पर रिलीज हॉलिवुड फिल्म 'समैरिटन' और नेटफ्लिक्स की फिल्म 'मी टाइम' का हाल।

असगर : नमस्कार, आदाब दोस्तों ले आया हूं आपका फेवरिट पॉडकास्ट आओ बिंज करें। यहां हम देते हैं फिल्मो और वेब सीरीज का दमदार और दिलचस्प रिव्यू। ताकि आप उन्हें सुनकर या पढ़कर तय कर पाएं कि आखिर इस हफ्ते क्या देखें। और अपने समय का सही उपयोग कर पाएं। तो इस हफ्ते मैं आपके लिए लाया हूं पांच फिल्मों और वेब सीरीज़ का रिव्यू।

सबसे पहली बात होगी डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही फिल्म कट पुतली की। फिर बात करेंगे नेटफ्लिक्स पर आए फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलिवुड वाइव्स के दूसरे सीजन की। साथ ही बताएंगे सोनी लिव पर स्ट्रीम हुई फिल्म सुंदरी गार्डन का हाल। वहीं अमेजॉन प्राइम विडियो पर रिलीज हुई हॉलिवुड फिल्म समैरिटन औऱ नेटफ्लिक्स की फिल्म मी टाइम का रिव्यू भी होगा।

1. कट पुतली फिल्म रिव्यू (Cuttputlli Review)

तो सबसे पहले बात अक्षय कुमार की फिल्म कटपुतली की। कटपुतली रहस्य में डूबी साइकॉलजिकल थ्रिलर है, जिसे देखकर लगता है कि इसने तो दर्शकों को ही 'कठपुतली' बना दिया। कुछ दिन पहले जी5 पर राधिका आप्टे, प्राची देसाई और विक्रांत मैसी की फिल्म आई थी फॉरेंसिक। अगर आपने वो फिल्म देख ली है तो इस फिल्म को ना ही देखें। सबकुछ वैसा ही लगता है।

चलिए पहले कहानी की बात कर लेते हैं फिर फिल्म का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। तो कहानी में लीड किरदार है अक्षय कुमार का अर्जन सेठी बने हैं। जिन्होंने सीरियल किलर पर रिसर्च करके फिल्म की कहानी लिखी है। मगर कोई भी प्रोड्यूसर उसपर फिल्म बनाने को राजी नहीं है। मगर जैसे धार्मिक टोटकों से बीमारी का इलाज करने का दावा किया जाता है, बिल्कुल उसी तरह अक्षय कुमार फटाफट पुलिस में भर्ती हो जाते हैं, ताकि घर खर्च चलाना आसान हो। 36 साल की उम्र में ही एसआई बनकर पोस्टिंग मिल जाती है कसौली मे। और ये सब फिल्म के अंदर फिल्मी तरीके से होता है। पुलिस में भर्ती की जल्दी देखिए गोली चलाना आता नहीं है। रिवॉल्वर भी इश्यू हो जाती है। तो कहानी कसौली में आगे बढ़ती है टीनएज लड़कियों का किडनैप हो रहा है। किडनैप करने के बाद ए डॉल का कटा सिर गिफ्ट पैक में छोड़ा जा रहा है। और फिर दो दिन बाद बेरहमी से मर्डर। मर्डर कौन कर रहा है? उसी किलर को ढूंढने के जिम्मेदारी फिल्मी तरीके से नए नवेले भर्ती हुए अक्षय कुमार को मिल जाती है। और जो फिल्म की स्क्रिप्ट अर्जन सेठी ने लिखी होती है। वो स्क्रिप्ट अब केस सुलझाने के काम आती है।

फिल्म को क्राइम थ्रिलर बनाया गया है। मगर वो इतनी ढीली रह गई है कि आप पहले ही पता लगा लेते हैं कि कातिल ये नहीं है, जिस पर शक कराया जा रहा है, बल्कि वो है जो सिर्फ एक सीन के लिए शुरुआत में ही सामने आया है, बेवजह बेमतलब। और फिल्म में अर्जन सेठी की एक भांजी है उसे देखकर भी समझ आ जाता है कि अच्छा ये किरदार सीरियल किलर के हाथों मारने के लिए बकरी की तरह रखा गया है कि शेर इसपर झपटेगा। और आप उस किरदार का बगैर किसी इमोशंस के मरने का इंतजार करते हैं। फिल्म बोझिल है।

पूरी फिल्म में सरगुन मेहता अक्षय कुमार की सीनियर होने के बावजूद कठपुतली बनी रह जाती हैं। ना ही वो अपने किरदार में कुछ खास कर पाई हैं। हिंदी सिनेमा में एक हीरोइन चाहिए होती है, शायद उसी कमी को पूरा करने के लिए रकुल प्रीत सिंह को रखा गया है। ताकि वो हीरो के साथ रोमांस या गाना वाना कर सकें। उनकी कहानी फिल्म को सपोर्ट करती नजर नहीं आती। फर्स्ट हाफ जितना सुस्त रहा है, आखिर उतना ही बेमज़ा। लगता ही नहीं फिल्म देख रहे हैं। क्योंकि इससे बेहतर क्राइम सस्पेंस और थ्रिलर तो आफ क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया में देख चुके हैं। रंजीत एम तिवारी का डायरेक्शन असरदार नहीं रहा है। रक्षाबंधन के बाद अक्षय कुमार की ये फिल्म और भी दुखदायी घटना है, जिसे देखकर लगता है आखिर अक्षय को क्या हो गया जो ऐसी फिल्मों के लिए हां कर दे रहे हैं।

2. Fabulous Lives of Bollywood Wives Season 2 Review
अब बात कर लेते हैं नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज फैबुलस लाइफ ऑफ बॉलीवुड वाइव्स की। ये सीरीज का दूसरा सीजन है। पहले सीजन में यह डार्क हॉर्स साबित हुई थी। लोगों को उम्मीद नहीं थी, जितनी यह वेब सीरीज पाप्युलर हो गई। इस सीरीज के पहिए भी चार बॉलीवुड वाइव्स के इर्द-गिर्द घूमते हैं। सीरीज संजय कपूर की वाइफ महीप कपूर, समीर सोनी की वाइफ नीलम कोठारी सोनी, चंकी पांडे की वाइफ भावना पांडे और सोहेल खान की एक्स वाइफ सीमा सजदेह की लाइफ पर बेस्ड है। इन सबकी पर्सनल लाइफ, फैमिली, सोशल लाइफ और फ्रेंड सर्कल पर ठीक-ठाक मेहनत की गई है। लेकिन इसकी हिंदी डबिंग काफी अटपटी सी है। पूरी सीरीज देखते हुए आपको बार-बार यह अहसास होता रहेगा, वाइल्ड लाइफ का कोई शो देख रहे हैं। जिसमें बिना इमोशंस के बस कमेंट्री कर दी गई है। इसमें एक सीन के बाद दूसरा सीन इतने अचानक से फ्लैश होता है, जैसे कोई ट्रैवलर समंदर पार करने के लिए शिप में बैठा हो और उसकी नींद खुले तो वह खुद को बस में बैठा पाए। कहने का मतलब है कि इनके बीच कोई कनेक्टिंग सीन नहीं डाले गए हैं। ड्रामा और रियलिटी का घालमेल भी तेल में पानी की मिलावट की तरह हो गया है। इसके चलते सीरीज किसी एक जोन में देर तक टिक ही नहीं पाती। यही रीजन है कि दर्शक भी इसके साथ देर तक नहीं टिक पा रहे हैं। सीरीज में किसने क्या राज़ खोले हैं? किसने कबूल किये हैं अपने पुराने अफेयर्स? यह जानने के लिए आपको सीरीज देखनी पड़ेगी।


3. सुंदरी गार्डन (Sundari Gardens Movie Review) फिल्म रिव्यू
चाहे कुछ भी हो जाए, ज़िंदगी चलती ही रहती है। और हमें ऐसे मुकाम पर ले जाती है, जिसके बारे में हम कल्पना भी नहीं कर सकते। ज़िंदगी के इन्हीं पहलुओं को सुंदरी गार्डन फिल्म दिखाती है। फिल्म का मुख्य किरदार है सुंदरी सारा मैथ्यूज, जिसको निभाया है अपर्णा बालमुरली ने।

फिल्म की शुरुआत मधुरा जीवा रागम के मधुर गीत से होती है, जो शांत माहौल क्रिएट करता है। नेचर के करीब ले जाता है। सुंदरी एक खुशमिजाज करैक्टर है। अपनी ज़िंदगी के गमों को भुलाकर खूबसूरती से जी रही है। वो अल्मा मेटर में लाइब्रेरियन है। घर में उसकी मां है, जिनके साथ पल गुज़ारने में उसे खुशी होती है। फिल्म में एंट्री होती है विक्टर पॉल की। पॉल के किरदार में हैं नीरज माधव। वो स्कूल में अंग्रेजी टीचर हैं। इन दोनों के ईर्द गिर्द ही कहानी बुनी गई है। इनके बीच आती हैं विक्टर की एक अन्य सहयोगी, लेखा। लेखा के किरदार में हैं लक्ष्मी मेनन। प्यार का ट्राएंगल है फिल्म में, मगर जिस तरह से ज़िंदगी के मानवीय मूल्यों को फिल्म में दिखाया गया है वो तारीफ के काबिल है। बिना ज्यादा शोर-शराबे के फिल्म लोगों को प्रगतिशीलता को अपनाने और तलाकशुदा जैसे पहलुओं को सामान्य करने के लिए फिर से प्यार में पड़ने और फिर भी एकांत में जीवन का आनंद लेने के लिए प्रेरित करती है। फिल्म में कलाकारों ने अच्छा काम किया है। चार्ली डेविस का डायरेक्शन भी बढ़िया है। फिल्म में पहाड़ों के खूबसूरत फ्रेम हैं। ये फिल्म मेरे हिसाब से देखी जा सकती है। हां थोड़ी कमी हिंदी डबिंग में रह गई है। डायलॉग ऐसे लगते हैं जैसे डिस्कवरी चैनल पर कमेंट्री सुन रहे हों। हिंदी में फील नहीं आता।

4. समैरिटन फिल्म रिव्यू (Samaritan Review in Hindi)
अब बात करते हैं समैरिटन की। समैरिटन के मायने होता है एक ऐसा शख्स जो लोगों की मदद करता हो। जब हम ईश्वर से मांगते हैं और कोई आकर मदद करे तो उसको समैरिटन बाइबल में कहा गया है। फिल्म में भी एक समैरिटन है, जिसके बारे में सब ये मान चुके हैं कि समैरिटन अब ज़िंदा नहीं बल्कि मर चुका है। मगर एक 13 साल का बच्चा Sam Cleary (Javon Walton) है, जिसे यकीन है कि Samaritan (Sylvester Stallone) ज़िंदा है। इसलिए वो हर दूसरे शख्स में समैरिटन को देखता है।

और फिर एक दिन ऐसा होता है कि उसे समैरिटन मिल ही जाता है। ये एक बूढ़ा शख्स है। जो अपनी पहचान छिपाकर सैम के पड़ोस में ही रह रहा है। मगर सैम अपने दोस्त की मदद के चक्कर में क्रिमिनल मास्टरमाइंड सायरस के संपर्क में आ जाता है। सायरस पूरे शहर पर अपना राज चाहता है। वो पूरे शहर की बिजली गुल करके अपने फैंस को भड़काता है कि हम लोगों की मदद कर रहे हैं। तुम शहर को लूटो। शहर लूटे जाने लगते हैं। लोग परेशान हैं। मीडिया वाले चर्चा कर रहे हैं कि क्या कोई हमें बचाने आएगा। सैम समैरिटन को सायरस के मूंसबों के बारे में बताता है। वो समैरिटन से कहता है शहर को बचा लो। मगर समैरिटन अपने साथ अतीत में हुई घटनाओं के वजह से बचाने नहीं आता। मगर जब खुद सैम सायरस के चंगुल में फंस जाता है। तो समैरिटन बचाने आता है। क्योंकि उसे समैरिटन से लगाव हो जाता है। और फिर दुनिया चिल्लाने लगती है हमारा मसीहा लौट आया। समैरिटन लौट आया। कैसे समैरिटन सायरस का खात्मा करता है। यह फिल्म देखने के बाद पता चलेगा।

मगर इतन तय है कि ये फिल्म बच्चों को पसंद आएगी। क्योंकि एक बच्चे के ईर्द गिर्द ही कहानी है। और एक सुपरहीरो की तरह समैरिटन आता है, जिस पर गोलियां असर नहीं करतीं। उसे गाड़ी कुचल भी दे तो वो मरता नहीं। बल्कि वो फिर से उठ खड़ा होता है। अगर फिल्म के डायरेक्शन की बात करें तो फिल्म क्रिस्प है। सैम के किरदार में Javon Walton ने बढ़िया काम किया है। Samaritan के किरदार में Sylvester Stallone फिट हैं। मगर एक्शन की वजह से एक्टिंग का स्कोप कम रहा है। Julius Avery का डायरेक्शन बढ़िया होने से एक्शन सीन प्रभावी नज़र आते हैं। फिल्म की कहानी में कुछ खास नहीं। वही हॉलिवुड का पुराना ढर्रा दुनिया तबाह हो रही है। सुपरहीरो बचा रहा है। खैर आप तय कर लें कि फिल्म देखनी है या नहीं। अब मैं बढ़ता हूं अगली फिल्म की तरफ।

5. मी टाइम फिल्म रिव्यू (Me Time Film Review)
और अब बात करते हैं नेटफ्लिक्स की फिल्म मी टाइम की। मी टाइम केविन हार्ट और मार्क वाह्लबर्ग (Kevin Hart and Mark Wahlberg) की कॉमिडी फिल्म है। हार्ट ने सन्नी का किरदार निभाया है। वो एक ऐसे पिता के रोल में है, जो घर पर अपने बच्चों की देखरेख करता है। और पत्नी माया यानी रेंजिना हॉल जॉब करती है। माया आर्किटेक्ट है। बच्चों की देखभाल में उसने खुद को समर्पित कर दिया है।

मी टाइम की कहानी जॉन हैम्बर्ग ने लिखी है। और डायरेक्ट भी उन्होंने ही किया है। कहानी ये है कि सन्नी अपनी ज़िंदगी जीने के लिए छुट्टी पर जाता है। वो गोल्फ खेलता है। मगर दिल नहीं लगता। अकेला हर जगह घूम लेता है। नए लोगों से मिलता है। मगर खुशी के बजाय उल्टा पुल्टा होता रहता है। फिर वो अपने दोस्त हक के साथ जाता है। जो अपनी ज़िंदगी के हर बर्थडे पर कुछ नया प्लान करता है। और इसबार उसने ऐसे जंगल को चुना है जो एडवेंचर से भरपूर जान को जोखिम में डालने वाली है। क्योंकि वहां सांप और जानवरों का खतरा है। मगर यहां सन्नी खुलकर एंजॉय कर पाता है। मगर दूसरी तरफ वो अपनी पत्नी के बॉस से टेंशन में आ जाता है उसे लगता है कि उसकी पत्नी का बॉस के साथ अफेयर चल रहा है। और फिर उससे बदला लेने के लिए होती हैं ऊंट पटांग हरकतें, जिनसे क्रिएट की गई है कॉमिडी। कॉमिडी ठीकठाक है। मगर फिल्म ऐसी नहीं जिसके लिए कहा जाए कि ना देखी तो मिस कर जाएंगे। इससे बेहतर तो मैं सजेस्ट करूंगा कि कपिल शर्मा का कोई शो देख लें। जहां बिना दिमाग पर जोर डाले आप एंटरटेन हो सकते हैं। बाशर्ते अगर उसमें बॉडी शेमिंग वाले जोक्स ना हों तो।

तो ये था आज का आओ बिंज करें। अगले हफ्ते फिर होंगे हाजिर नए शोज और फिल्मों का रिव्यू लेकर। तबतक के लिए हमें दें इजाजत। सुनते रहें आओ बिंज करें।

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