अमेरिकन फैंटेसी ड्रामा गेम ऑफ थ्रोन्स के लिए फैंस की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। अब गेम ऑफ थ्रोन्स का प्रीक्वल हाउस ऑफ द ड्रैगन आया है, कितनी दमदार है ये सीरीज? हुमा कुरैशी ने महारानी के दूसरे सीजन में क्या तहलका मचाया? पंकज त्रिपाठी की वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस अधूरा सच ने क्या रंग जमाया? तमिल रॉकर्स ने फिल्म पाइरेसी के मुद्दे को किस ढंग से दिखाया? तमाम सवालों के जवाब जानें नवभारत गोल्ड के स्पेशल पॉडकास्ट आओ बिंज करें में

असगर : नमस्कार आदाब। ले आए हैं इस हफ्ते का आओ बिंज करें। यहां हम आपको सुनाते हैं उन वेब सीरीज और फिल्मों का हाल जो आई होती हैं ओटीटी प्लैटफॉर्म पर। जिसे सुनकर आप तय कर पाएं किसे देखना रहेगा सही फैसला, ताकि आपका समय ना हो खराब, तो रिव्यू के लिए मेरे साथ हैं उपमा सिंह। बताइए उपमा आज कौन से पांच शो या वेबसीरीज हैं, जिन्हें ओटीटी पर देखा जा सकता है।

उपमा:
आज हम बात करेंगे, नेटफ्लिक्स की चर्चित सीरीज देल्ही क्राइम के दूसरे सीजन की, सोनी लिव पर आई सीरीज महारानी 2 और तमिल रॉकर्स की, डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर आई हाउस ऑफ द ड्रैगन और क्रिमिनल जस्टिस अधूरा सच की।

असगर : तो ठीक है फिर सबसे पहले बात कर लेते हैं हाउस ऑफ द ड्रैगन्स की। बताइए कितनी रहस्मयी दुनिया है हाउस ऑफ द ड्रैगन्स की।

1. हाउस ऑफ द ड्रैगन रिव्यू
सबसे पहले बात हाउस ऑफ द ड्रैगन की। अमेरिकन फैंटेसी ड्रामा गेम ऑफ थ्रोन्स के लिए फैंस की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। आठ सीजन तक दर्शकों को बांधे रखने वाला गेम ऑफ थ्रोन्स आखिरकार खत्म हो गया, तो अब इसके दीवानों के लिए एक नई सौगात हाउस ऑफ द ड्रैगन के रूप में आई है। ये सीरीज गेम ऑफ थ्रोन्स का प्रीक्वल यानी पहले की कहानी है। सीरीज में विशाल ड्रैगन्स के मालिक टारगेरियन घराने के आगाज की कहानी है, जो मैड क्वीन डिनेरिस टारगेरियन के जन्म से 172 साल पहले की है। हालांकि, जीओटी की तरह यहां भी सारी जंग आइरन थ्रोन के लिए ही है। टारगेरियन घराने के बड़े शहजादे विसेरिस यानी पैडी कोंसीडाइन को किंग चुना जाता है, जबकि उसका छोटा भाई डीमन यानी मैट स्मिथ और बहन रेनीस यानी ईवा बेस्ट भी खुद को उत्तराधिकारी मानते हैं। विसेरिस हर कोशिश करता है कि उसका एक बेटा हो जाए, जिसे वह अपने बाद राजा बना सके। इसके लिए वह अपनी पत्नी तक को कुर्बान कर देता है लेकिन ईश्वर को यह मंजूर नहीं होता और आखिर में वह नियमों के खिलाफ अपनी बेटी रेनेरा यानी एम्मा डी आर्की को गद्दी सौंप देता है।

हॉटस्टार पर यह सीरीज एपिसोडिक तौर पर प्रसारित की जा रही है, जिसके नए एपिसोड हर सोमवार आएंगे। पहले ही एपिसोड में काफी खून-खराबा और जंग दिखती है, जो निश्चित तौर पर आगे जाकर और बढ़ेगी। हालांकि, ये सारी राजनीति कहीं न कहीं गेम ऑफ थ्रोन्स की ही झलक लगती है। रेनेरा में जहां डिनेरिस वाला अंदाज दिखता है, तो वैश्यालयों में वक्त बिताने वाला नकारा डीमन कभी-कभी टीरियन लैनिस्टर की याद दिलाता है। ऐसे में, पहले एपिसोड की बात करें, तो कहानी में कोई बेहद नई या अनोखी बात नहीं दिखती, इसके बावजूद फैंस ने इस पर खूब प्यार बरसाया है और अगले एपिसोड की बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

2. क्रिमिनल जस्टिस अधूरा सच रिव्यू
असगर :
दूसरे नंबर पर बात क्रिमिनल जस्टिस अधूरा सच वेब सीरीज की। ये सीरीज का तीसरा सीजन है। जिसमें एक परिवार है, इमोशंस हैं, जिम्मेदारी है, रिश्तों में मनमुटाव है। पहचान है। उस पहचान में दबता एक किशोर है। और वही किशोर सीरीज में मर्डर होने के बाद प्राइम सस्पेक्ट बनता है। शुरुआत में ही क्लियर कर देता हूं, सीरीज सिर्फ आपको थ्रिल सस्पेंस में नहीं रखती है। बल्कि ज़िंदगी के तमाम पहलुओं से गुज़ारती है कि कैसे और क्यों किन हालात में रहने के बाद कोई कैसा बनता है।

सीरीज की कहानी ये है कि एक परिवार है, जिनके एक बेटा मुकुल और बेटी ज़ारा है। ज़ारा एक फेमस टीवी स्टार है। उसकी पहचान इतनी है कि उसका भाई उस पहचान में खो सा गया है। परिवार में मां बाप ज़ारा पर ही फोकस करते हैं। पूरा घर भी ज़ारा के हिसाब से ही सेट है, और शुरुआती सीन भी ये सब दिखा देता है कि घर में ज़ारा पर कितना लाड प्यार है और मुकुल की कितनी अनदेखी है। मगर कहानी आगे बढ़ती है। एक प्राइवेट पार्टी में ड्रग्स का इस्तेमाल होता है। नाच गाना और फिर मर्डर होता है ज़ारा का। किसने मारा और क्यों इसी सवाल पर पूरी कहानी टिकी है। मगर मुकुल पूरे केस में फंसता चला जाता है। मीडिया कॉन्सपिरेसी की थ्योरियां गढ़ता है। नए नए हेडिंग से टीवी एंकर चिल्लाते हैं। अपनों ने ही ले ली जान टाइप। फिर एंट्री होती है वकील माधव मिश्रा की। मुकुल की मां अपने बेटे को पुलिस से बचाने के लिए माधव के पास पहुंचती हैं। माधव केस लड़ता है और फिर खुलती है हर किरदार की कहानी।

अदाकारी की बात करें तो माधव मिश्रा के किरदार में है पंकज त्रिपाठी हैं, जो मैन ऑफ द शो हैं। उनकी पत्नी रत्ना का किरदार किया है खुशबू अत्रे ने। रत्ना अपने घर में ब्यूटी पार्लर चलाती है। उनकी और माधव मिश्रा की केमिस्ट्री बढ़िया लगी है। स्वास्तिका मुखर्जी मुकुल की मां बनी हैं, जो किसी भी तरह बस अपने बेटे को बचाना चाहती हैं। श्वेता बासु प्रसाद, पूरब कोहली, गौरव गेरा और उपेन्द्र लिमये भी इस सीज़न में नज़र आएंगे। जो अपने किरदारों में परफेक्ट नज़र आए हैं। अभी दो ही एपिसोड डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रहे हैं। हर शुक्रवार को एक एपिसोड आएगा। कहानी बिल्ड अप हो गई है। आगे क्या हुआ और क्यों ये सवाल आपको हर एपिसोड का इंतजार कराएगा। अब आप तय कर लें कि सीरीज़ देखनी है या नहीं।

3: देल्ही क्राइम 2 रिव्यू (Delhi Crime 2 Reveiw)
देल्ही क्राइम ओटीटी का पाथ ब्रेकिंग शो रहा है। उसे जब एमी अवॉडर्स में बेस्ट ड्रामा सीरीज से नवाजा गया था तो ये पूरे हिंदुस्तानी मनोरंजन जगत के लिए गर्व की बात थी। ऐसे में, इस सीरीज का दूसरा सीजन लाते वक्त मेकर्स पर इसकी साख बचाए रखने का दबाव जरूर रहा होगा। उस पर पिछली बार सीरीज का विषय भी देश को हिला देने वाला निर्भया केस था, जिससे दर्शक आसानी से जुड़ गए थे, इसलिए इस बार एक नए विषय, अपराध की नई कहानी से दर्शकों को जोड़ना भी चुनौती रही होगी। लेकिन अच्छी बात ये है कि देल्ही क्राइम का ये दूसरा सीजन इन सारी चुनौतियों पर खरा उतरता है। इस बार दिल्ली के पॉश इलाके में रईस बुर्जुगों की संगीन हत्या से तफ्तीश शुरू होती है। शक की सुई 90 के दौर के कुख्यात कच्छा-बनियान गैंग पर जाती है। कैमरे की नजरें और गवाह भी इसी शक की तस्दीक करते हैं, जिससे दिल्ली में खौफ का माहौल बन जाता है। इसलिए, एसीपी वर्तिका चतुर्वेदी और उनकी टीम पर एक बार फिर गुनहगारों को जल्द से जल्द पकड़ने का दबाव है। लेकिन कहानी इस बार सिर्फ पुलिस और अपराधी की धर-पकड़ तक सीमित नहीं रहती, उससे आगे बढ़कर हमारे समाज के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक माहौल पर भी गंभीर टिप्पणी करती है। सीरीज का आगाज ही इस डायलॉग से होता है कि ‘दिल्ली का एक बहुत बड़ा तबका है जो रहता बस्तियों में है पर काम उनके लिए करता है जो दिल्ली के महलों में रहते हैं, ऐसे शहर को पुलिस करना पेचीदा काम है।’

सीरीज समाज में पसरी अमीर और गरीब की खाई के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। साथ ही पिछले सीजन की तरह, पुलिस महकमे की चुनौतियों, दबावों के प्रति भी संवेदना जगाती है। जैसे, एसीपी नीति सिंह यानी रसिका दुग्गल जिस तरह अपनी ड्यूटी और शादीशुदा जिंदगी के बीच जूझती है, काम के प्रति बेहद सजग भूपिंदर यानी राजेश तैलंग एक पिता के तौर पर अपनी बेटी की शादी को लेकर परेशान रहता है्र कहानी हर किसी को मानवीय नजरों से देखती है, ड्रमैटिक अंदाज में नहीं और यही देल्ही क्राइम की सबसे बड़ी खूबी है। इसकी हर चीज असलियत के करीब लगती है, जिसके लिए इसकी क्रिएटर रिची मेहता और डायरेक्टर तनुज चोपड़ा की तारीफ बनती है। साथ ही तारीफ बनती हैं, इसके कलाकारों की। शेफाली शाह एक बार फिर एसीपी वर्तिका चतुर्वेदी के रूप में ऐसे ढली हैं, जैसे वे इस किरदार से निकली ही न हों। यह निश्चित तौर शेफाली के निभाए यादगार किरदारों में से एक है। इसके अलावा, उनकी टीम के साथियों में रसिका दुग्गल, राजेश तैलंग आदि उनका मजबूती से साथ देते हैं। ऐसे में, अगर आपने देल्ही क्राइम का पहला सीजन देखा है, तो दूसरा सीजन देखना बनता ही है। अगर नहीं भी देखा तो भी यह बढ़िया सीरीज बिंज वॉच करने का मौका न चूकें।

4. तमिल रॉकर्स रिव्यू (Tamil Rockers review)
आज के दौर में बॉलिवुड बनाम साउथ सिनेमा चल रहा है। कहा जा रहा है, कि बॉलिवुड पिट रहा है और साउथ सिनेमा चल रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि सारा मसला फिल्म के लीक होने पर टिका है। मैं अपने यहां ही देखता हूं, इधर फिल्म सिनेमा हॉल में आती है, उधर लोग बोलते हैं कि फिल्म उनके मोबाइल में है, देखोगे? तो जब फिल्म मोबाइल में है, तो कौन सिनेमाघर जाएगा? अब सवाल है कि फिल्म उन तक इतनी जल्दी कैसे पहुंची? यानी फिल्म रीलीज होते ही लीक कर दी गई। इंटरनेट पर डाल दी गई। फिल्मों की लीक होने और पाइरेसी के धंधे पर ही बनी है वेब सीरीज तमिल रॉकर्स। 19 अगस्‍त को यह सोनी लीव पर स्‍ट्रीम हो गई है। पहले सीजन में 8 एपिसोड हैं। स्‍टारकास्‍ट की बात करें तो अर्जुन विजय हैं, वानी भोजन, इस्‍वर्य मेनन, अजगम पेरूमल, विनोदनी वैद्यनाथन हैं।

अब बात कहानी की। सीरीज में तमिल रॉकर्स नाम का गैंग, जो सच्ची घटानाओं पर आधारित है। ये गैंग किसी भी मूवी को कुछ ही मिनटों में ऑनलाइन लीक करने में माहिर होता है। पहले ही एपिसोड में दिखता है कि एक मूवी लीक होने से फिल्‍म प्रोड्यूसर सुसाइड कर लेता है। इसके बाद फिल्‍म प्रॉड्यूसर काउंसिल परेशान हो जाता है। इसके बाद सुपर स्‍टार आदित्‍य की 300 करोड़ की मूवी गरूड़ रिलीज होने वाली होती है। अब सबकी कोशिश है कि गरूड़ की पाइरेसी रोकी जाए। लेकिन लीक होने का खतरा गरूड़ पर मंडरा रहा होता है। तमिल रॉकर्स गैंग ऐलान भी कर देता है कि गरूड़ मूवी को रिलीज से एक दिन पहले लीक कर देगा।

यह पूरा मामला साइबर सेल तक पहुंचता है। डीआईजी संदीप मेनन ने एसीपी रुद्र यानी अरुण विजय को एक विशेष टीम की जिम्‍मेदारी दी है। इस टीम में साइबर फॉरेंसिक ऑफिसर संध्‍या यानी वाणी भोजन हैं, साइबर क्राइम ऑफिसर भानु यानी विनोधिनी वैद्यनाथन हैं, और इंस्‍पेक्‍टर नेल्‍सन यानी विनोद सागर हैं। यह टीम गरूड़ मूवी को रिलीज से पहले ऑनलाइन लीक को रोकने के लिए एक्टिव हो जाती है। क्या टीम फिल्म लीक होने से बचा पाती है? और किस तरह फिल्मों को हिट कराने के फॉर्मूले आजमाए जाते हैं, ये सीरीज देखने पर पता चलेगा।

सीरीज पाइरेसी के धंधे को जिस अंदाज़ से दिखाती है, वो दिलचस्प कम उलझी हुई ज़्यादा नज़र आती है। करैक्टर्स ठीक से उभारे नहीं गए हैं। एडिटिंग टाइट की जा सकती थी। हिंदी पट्टी को जोड़ने के लिए फिल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप के ज़रिए सरकार पर कटाक्ष भी किया गया है।

5. महारानी 2 रिव्यू
हुमा कुरैशी की मुख्य भूमिका वाली सीरीज महारानी का पहला सीजन आया था, तब इसे बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी से प्रेरित माना गया था। इसके पीछे वाजिब वजहें भी थीं। सीरीज में राबड़ी देवी की ही तरह गांव में घर-बच्चे, चौका-चूल्हा, गोबर-सानी में व्यस्त रहने वाली अंगूठाछाप रानी भारती यानी हुमा को उसका मुख्यमंत्री पति भीमा भारती यानी सोहम शाह रातोंरात मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा देता है। लेकिन सीरीज खत्म होते होते यह रानी दिखा देती है कि वह अपने पति के इशारों पर चलने वाली सिर्फ एक रबर स्टैंड मुख्यमंत्री बनकर रहने वाली नहीं। बल्कि वह अपने पद को गंभीरता से लेते हुए अपने बिहार का दाना खाने वाले भ्रष्टाचारियों को जेल भेजने से भी नहीं चूकती, फिर उसमें खुद उसका पति भीमा भारती ही क्यों न शामिल हो।

पहले सीजन में इस रोचक मोड़ पर खत्म हुई सीरीज की कहानी दूसरे सीजन में भी बहुत ही रोचक अंदाज में शुरू होती है। पहले ही एपिसोड में रानी तीन सदस्यीय इंक्वॉयरी कमिटी के सामने के सामने है, जहां उससे पहला ही सवाल ये दागा जाता है कि क्या आप अपने पति भीमा भारती की हत्या की साजिश में शामिल हैं? इसी सवाल के साथ आपकी रुचि भी कहानी में जग जाती है कि अरे, भीमा भारती नहीं रहा? ऐसा क्या हुआ? और कहानी फ्लैश बैक में पहुंच जाती है, जहां रानी अपने ही पति और पार्टी के सदस्यों का विरोध झेल रही है। वहीं, दूसरी तरफ, नवीन यानी अमित सियाल धर्म का सहारा लेकर एक बार फिर खुद के मुख्यमंत्री होने का सपना सच करने निकल पड़ा है। इन सबके बीच रानी खुद को महारानी बनाने में जुटी रहती है। इस बार आरक्षण के बहाने जाति की राजनीति, धर्म की राजनीति यह सब देखने को मिलता है। कहानी में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है तो ड्रामा भी खूब है, इसलिए आखिर तक सीरीज में रुचि बनी रहती है।कुछ सामाजिक विषय, जैसे अगड़ी जाति के स्कूली बच्चों का पिछड़ी जाति की औरत का बनाया मिड डे मील न खाने, आरक्षण के विरोध में एक लड़के का आत्मदाह जैसे मुद्दे भी दिखते हैं लेकिन ये विषय बस छूकर छोड़ दिए गए हैं।

सीरीज के क्रिएटर सुभाष कपूर ने बिहार और वहां की राजनीति की नब्ज बखूबी पकड़ी है। उस पर, जैसे दिल्ली भारत नहीं है, वैसे पटना बिहार नहीं है, राजा से केवल वादा, नारा और गुंडाराज मिला अब रानी से ही उम्मीद है, जैसे डायलॉग मारक हैं। वहीं, ऐक्टिंग की बात करें तो रानी भारती के रूप में हुमा की छाप और गहरी होती है। वह किसी भी पल अपना किरदार नहीं छोड़तीं। सोहम शाह को भी भीमा के रूप में इस बार ज्यादा विस्तार मिला है तो अमित सियाल ने तो बिहारी नेता के रूप में मास्टरी हासिल कर ली है। इसके अलावा, विनीत कुमार, अतुल तिवारी आदि अपनी भूमिका में जमते हैं, तो कुल मिलाकर एक बढ़िया राजनीतिक ड्रामे के तौर पर महारानी दूसरी बार भी बाजी मार ले जाती है। बस ये है कि सीरीज में 50-50 मिनट के 10 एपिसोड हैं, तो इसे पूरी देखने के लिए थोड़े धैर्य की जरूरत पड़ती है, इसे थोड़ा और कसा जा सकता था।

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