यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • क्रिकेट के मैदान पर कैसे मौत हुई थी जेसपर विनाल की?
  • किन टीमों के बीच खेला जा रहा था वो मैच, जिसमें मौत हुई?
  • क्रिकेट के नियमों को बदलने में कैसे 100 साल लग गए?
  • क्रिकेट का इतिहास और दुखदायी किस्सा जानने के लिए

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साल 2001 में मशहूर निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की फिल्म रिलीज हुई थी, 'लगान'। आमिर खान लीड रोल में थे और उन्हीं की कप्तानी में भारतीयों ने अंग्रेज़ों को क्रिकेट मैच में हराया और शर्त के मुताबिक अपना लगान माफ कराया। आमिर की इस फिल्मी टीम का एक खिलाड़ी था गुरन बाबा। यह रोल निभाया था राजेश विवेक उपाध्याय ने।

आज गुरन बाबा की बैटिंग देखकर बहुत लोगों को मिस्टर 360 डिग्री कहे जाने वाले पूर्व दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेटर एबी डिविलियर्स की याद आ जाएगी। क्या गजब के आड़े-तिरछे शॉट्स खेले थे गुरन बाबा ने! भले फिल्मी ही सही, लेकिन तालियां तो खूब बजी थीं। इसमें भी एक शॉट तो कमाल ही था। डिविलियर्स और विराट कोहली जैसे बल्लेबाज़ों के भी बस के बाहर का शॉट। एक गेंद को दो बार हिट करना।

पर्दे पर कैप्टन रसेल के बोलर दम लगाकर गेंद फेंकते, लेकिन गुरन बाबा उनके सारे दम की हवा निकाल देते। पहले वह गेंद को हल्के हाथों से खेलते। जब बॉल उनके पास हवा में उछल जाती, तो फिर पूरा जोर लगाकर बल्ला घुमाते। गेंद सीधे बाउंड्री के पार।

Vinall incident,  Edward Tye, Cricket Rules,

गुरन बाबा की कहानी याद इसलिए आई, क्योंकि असल क्रिकेट में भी ऐसा हो चुका है। फिल्म में तो रसेल के खिलाड़ी बच गए, लेकिन हक़ीक़त में इस शॉट के कारण दो क्रिकेटर्स को मैदान पर अपनी जान गंवानी पड़ी। यह वाकया उस वक़्त का है, जब क्रिकेट का उदय हो रहा था और खेल के कुछ गिने-चुने नियम ही बने थे।

साल था 1624 और तारीख 28 अगस्त। इंग्लैंड के ससेक्स में दो टीमों के बीच मैच खेला जा रहा था। यह एक इंटर विलेज मैच था। क्रीज पर थे वेस्ट होथली के बल्लेबाज़ एड्वर्ड टाई और उनके नजदीक ही फील्डिंग पोजिशन लिए खड़े थे जेसपर विनाल। सबकुछ सामान्य था, लेकिन गेंदबाज़ के बॉल फेंकने के कुछ सेकंड बाद ही मैदान पर मातम पसर गया। टाई ने शॉट खेला, पर गेंद बल्ले पर भरपूर आई नहीं और पास में ही ऊपर उठ गई।

विनाल गेंद लपकने के लिए आगे बढ़ रहे थे और टाई अपना विकेट बचाने के लिए। टाई के पास अधिकार था कि वह बॉल को दोबारा मारें। दोनों खिलाड़ियों की नज़र थी गेंद पर। टाई ने जोर से बैट घुमाया। लेकिन, गेंद वहीं ज़मीन पर गिर पड़ी और साथ में विनाल भी। टाई का बल्ला सीधे विनाल के सिर से टकराया था। उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

Vinall incident,  Edward Tye, Cricket Rules,

मैदान पर घायल हुए जेसपर विनाल ने 13 दिन बाद इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह क्रिकेट इतिहास में मैदान पर किसी खिलाड़ी की जान जाने की पहली घटना थी। लेकिन, टाई ने क्रिकेट नियमावली के तहत ही गेंद को दोबारा हिट करने का प्रयास किया था। यह उनका हक़ था। ऐसे में उन्हें कोई सजा नहीं मिली।

अब अगर आप यह सोच रहे हैं कि इस घटना के बाद क्रिकेट के नियमों में बदलाव किए गए, तो ऐसा नहीं है। कुछ ऐसा ही वाकया फिर घटा 23 साल बाद यानी 1647 में। वेस्ट ससेक्स के सेलसे में मैच हो रहा था। एक और बल्लेबाज़ ने अपना विकेट बचाने के चक्कर में गेंद पर दोबारा बल्ला चलाया और बल्ले के सामने सिर पड़ा हेनरी ब्रांड नाम के खिलाड़ी का। उनकी भी मौत हो गई।

cricket rules

इस घटना के बाद भी क्रिकेट के नियमों को बदलने में लगभग 100 साल लग गए। रॉयल आर्टिलरी कंपनी, लंदन ने एक मीटिंग बुलाई। 1744 का साल था। यह पहली मर्तबा था, जब क्रिकेट के नियमों की रेखा खींची गई। इस मीटिंग में कई अहम क्रिकेट क्लब के प्रमुख लोगों को आमंत्रित किया गया था। काफी बहस और विचार विमर्श के बाद नियमों का खाका तैयार हुआ। इसे 'लॉ ऑफ द गेम एट क्रिकेट' का नाम दिया गया। क्रिकेट दुनिया के कई हिस्सों में खेला जाने लगा था, इसलिए खेल के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 'लॉ' शब्द पर जोर दिया गया। हालांकि सहमति से बनाए गए इन नियमों को औपचारिक तौर पर छपने में 1755 तक का समय बीत गया।

12 साल बाद 1767 में यह नियम दोबारा से जारी किए गए। फिर कहीं जाकर यह कायदे से लागू हो पाए। इन दस्तावेजों में ही क्रिकेट पिच की दूरी, गेंद का वजन, स्टंप्स का साइज और उनके बीच का अंतर जैसी चीज़ें तय की गईं। और जो सबसे अहम चीज़ थी, वो यह कि बल्लेबाज़ एक वाजिब गेंद को विकेट के सामने सिर्फ एक बार ही हिट कर सकेगा। दोबारा ऐसी कोशिश करने पर उसे आउट करार दिया जाएगा। इस नियम के बाद ही जेसपर विनाल और हेनरी ब्रांड जैसे खिलाड़ियों के साथ हुई जानलेवा घटनाएं रुकीं।

आवाज़ : मोहित सिन्हा

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