यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • श्रीलंका में राजनीतिक अस्थिरता के बारे में जानने के लिए
  • जन विद्रोह के बीच श्रीलंका में क्रिकेट का सफल आयोजन कैसे हुआ?
  • ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंका में अस्थिरता के बावजूद दौरा कैसे पूरा किया?
  • क्या श्रीलंका में आतंकी घटनाओं के चलते क्रिकेट दौरे रद्द हुए हैं?

Australia vs Sri Lanka: आजकल अख़बार के पन्ने पलटने या फिर टीवी पर न्यूज चैनल बदलने के दौरान आपको श्रीलंका की खबर मिल ही जाती होगी। हालात ही कुछ ऐसे हैं। श्रीलंका आर्थिक संकट से गुजर रहा है और यहां के लोगों के सामने बिजली, ईंधन की कमी जैसा संकट है। खाने के भी लाले पड़े हैं। सत्तासीन नेता गद्दी खाली कर भाग रहे हैं। नई सरकार के गठन की चर्चाएं हैं, लेकिन फौरी राहत की कोई तस्वीर सामने नज़र नहीं आ रही। कुछ देर के लिए दिल बहलाने वाली कोई तस्वीर अगर श्रीलंका से तलाशना चाह रहे हैं, तो क्रिकेट का मैदान मौजूं जगह हो सकती है। मैं ऐसा क्यों लिख रहा हूं वो आगे बताऊंगा लेकिन पहले आपको दो सूक्तियां बताता हूं। पहली एक लैटिन लेखक पब्लिलियस साइरस की है। उन्होंने कहा था, 'जहां एकता है, वहां हमेशा जीत होती है।' और दूसरी सूक्ति यह कि 'सत्ता लोगों को भ्रष्ट नहीं करती, लोग सत्ता को भ्रष्ट करते हैं'। यह कहना था अमेरिकी नॉवलिस्ट विलियम गेद्दिस का।

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संसद में भी गूंजा था क्रिकेट का वह विवाद

श्रीलंका में फिलहाल जो हो रहा है, वो इन दोनों सुविचारों के इर्द गिर्द की तस्वीर है। भ्रष्टाचार और लापरवाह राजनीति ने श्रीलंका को इस मुहाने पर ला खड़ा किया। देश की जनता ने एकता दिखाई तो गोटाबाया राजपक्षे को कुर्सी छोड़नी पड़ी। एकजुटता और समरसता की ही एक और तस्वीर इस संकट भरे हालात में सामने आई, जो बेहद सुखद एहसास कराती है। यह तस्वीर क्रिकेट के मैदान से है। खास बात यह है कि इस तस्वीर से नज़र आता है कि ना यह पहले वाला श्रीलंका है और ना ही पहले वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम।

श्रीलंका में गृह युद्ध जैसे माहौल के बीच शांतिपूर्ण तरीके से क्रिकेट का आयोजन अपने आप में बड़ी बात है। वरना इतिहास के पन्ने पलटे तो श्रीलंका से जुड़ी कई ऐसी घटनाएं मिल जाएंगी जब कई सीरीज़ या तो रद्द कर दी गईं या फिर अधूरी ही रहीं। साल 1980 के दशक में लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) बड़े आतंकी संगठन के तौर पर उभरा। श्रीलंका में आतंकी हमले आए दिन बढ़ने लगे। 1987 में न्यूजीलैंड की टीम श्रीलंका दौरे पर थी। 21 अप्रैल को एक बस स्टेशन पर कार बम धमाके में 100 से ज्यादा लोग मारे गए। नतीजा यह हुआ कि श्रीलंका और न्यूजीलैंड के बीच तीन टेस्ट सीरीज़ का एक ही मैच खेला जा सका और बाकी मैच रद्द कर दिए गए।

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पांच साल बाद 1992 में फिर से कुछ ऐसा ही हुआ। 16 नवंबर को जिस होटल में न्यूजीलैंड की टीम रुकी थी, उसके ठीक बाहहर एक आत्मघाती बम धमाका हुआ। इस हमले के बाद न्यूजीलैंड के कोच और पांच खिलाड़ी स्वदेश लौट गए। 1996 में श्रीलंका में वनडे क्रिकेट विश्वकप आयोजित किया गया था लेकिन यहां एक बार फिर से आतंकी हमले के चलते ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज ने कोलंबो में विश्वकप के अपने शुरुआती मुकाबले खेलने से मना कर दिया। वक्त के साथ घाव कम होने की बजाए बढ़ने लगे 2001 में तमिल टाइगर्स ने एक बार फिर सुसाइड अटैक किया जिसके चलते कोलंबो एयरपोर्ट बंद करना पड़ा। यह घटना ऐसे में हुई थी जब न्यूजीलैंड की टीम श्रीलंका दौरे पर थी। बहरहाल लिट्टे का प्रभाव खत्म कम होने के साथ ही श्रीलंका में क्रिकेट पटरी पर लौट आया।

उस दौर के उलट श्रीलंका में मौजूदा सूरतेहाल कुछ अलग हैं। जिन प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति आवास तक को निशाना बना लिया, उनके लिए भला क्रिकेट ग्राउंड तक पहुंचना कौन सी बड़ी बात है। 9 जुलाई को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोग श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया के बीच गाले में जारी टेस्ट मैच के भी करीब पहुंच गए। लेकिन मैच पर कोई आंच तक नहीं आई। प्रदर्शनकारियों ने स्टेडियम के बाहर और अंदर पोस्टर लहराए। गाले में मौजूद स्टेडियम के पास एक फोर्ट पर भी प्रदर्शनकारी चढ़ गए, जबकि अमूमन वहां मैच के दौरान किसी के आने जाने पर मनाही होती है।

मैदान पर जीत के लिए श्रीलंकाई क्रिकेट जोर लगा रहे थे और देश में सुशासन के लिए जनता। यह सबकुछ श्रीलंका के इतिहास में पहली बार हो रहा था। वैसे जब भी किसी घटना को लेकर कोई यह कहे कि ऐसा इतिहास में पहली बार हो रहा है तो वह घटना या तो बहुत अच्छी होती है या फिर बहुत बुरी। इस मैच में भी कुछ ऐसा ही हुआ। श्रीलंका ने ऑस्ट्रेलिया को पारी और 39 रन से हार दिया, यह इतिहास में पहली बार हुआ। बेबसी के इस माहौल में श्रीलंका के लिए यह जीत ऐसी मानो सियाह रातों में उसे कहीं दूर एक धुंधली सी लौ जलती दिखाई दी हो।

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इस राहत भरी तस्वीर में ऑस्ट्रेलिया ने भी श्रीलंका का कम साथ नहीं दिया। वो टीम जिसपर बॉल टेम्परिंग विवाद का आरोप हो, जो मैदान पर अपने आक्रामक खेल और स्लेजिंग को लेकर मशहूर हो, वह अगर ऐसे संकट भरे हालात में श्रीलंका के साथ मैदान पर खेल जारी रखने का साहस दिखाती, तो यह अपनेआप में काफी बड़ी बात है। बौखलाई भीड़ चुनकर किसी को निशाना नहीं बनाती, वो तो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को कुचलते हुए आगे बढ़ती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा की चिंता लाजमी रही होगी। लेकिन वह मैदान से हटे नहीं। श्रीलंका में अपना टूर पूरा किया। बीते 24 जून को जब पांच वनडे सीरीज़ का आखिरी मुकाबला खेला जा रहा था, तो उस वक्त स्टेडियम में काफी संख्या में श्रीलंकाई दर्शक पीली जर्सी में नजर आए। यह नजारा भावुक करने वाला था।

श्रीलंकाई मुश्किल की इस घड़ी में श्रीलंका में क्रिकेट खेलने के लिए कंगारुओं का आभार जता रहे थे। स्टेडियम में सैकड़ों ऐसी तख्तियां थीं, जिन पर ऑस्ट्रेलिया के लिए प्यार भरे संदेश लिखे गए थे। वनडे सीरीज़ श्रीलंका के नाम जरूर रही, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों ने दिल जीत लिया। एरोन फिंच और कई खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया के जरिए श्रीलंका का आभार जताया। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने तो बाकायदा फोटो साझा करते हुए श्रीलंकाई दर्शकों को शुक्रिया कहा। इस तरह से खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों की एकजुटता से एक तरफ क्रिकेट जीत गया, तो दूसरी तरफ जनता की एकजुटता ने भ्रष्ट सरकार को गद्दी खाली करने पर विवश कर दिया।

पब्लिलियस साइरस ने एक और बात कही थी- 'सबसे मधुर आनंद कठिनाइयों को दूर करने से मिलता है।' शायद श्रीलंका का सबसे मधुर आनंद इस मुश्किल के बाद उसका इंतजार कर रहा हो।

आवाज़ : शबनम


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