यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • युजवेंद्र चहल को लेकर सोशल मीडिया पर क्यों पूछे गए सवाल?
  • इस साल टी-20 में कैसा रहा है युजी का प्रदर्शन?
  • शतरंज में नैशनल लेवल पर खेलने के बाद क्रिकेट में कैसे आए चहल?
  • किसके नाम पर रखा गया है युजवेंद्र का नाम?

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चहल कहां हैं? कहां चले गए चहल, मिल क्यों नहीं रहे? क्या आपको कहीं युजी दिख रहे हैं?
बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज टूर पर पांच टी-20 मैचों की सीरीज के लिए दोपहर में टीम अनाउंस की थी। 18 खिलाड़ियों की लिस्ट लोगों ने ऊपर से नीचे तक पढ़ डाली। स्पिनर्स कोटे में रविंद्र जडेजा मिल गए, अक्षर पटेल का नाम था। कुलदीप यादव ने वापसी कर ली और रविचंद्रन अश्विन भी लौट आए, पर चहल नहीं थे। बस... लोगों ने सवाल पूछना शुरू कर दिया कि चहल कहां चले गए?

Yuzvendra Chahal  india vs england odi series

जवाब कुछ घंटों बाद आया, वह भी लॉर्ड्स से। क्रिकेट के मक्का में चहल-पहल मच रखी थी और ऐसा करने वाले थे चहल। जॉनी बेयरस्टो, जो रूट, बेन स्टोक्स और मोईन अली को पवीलियन भेजा उन्होंने। आकाश चोपड़ा क्रिकेट कमेंट्री करते समय हमेशा कुछ अलग अल्फाज़ों का इस्तेमाल करते हैं। कभी छक्के को आधा दर्जन रन बोल दिया, तो कभी कह दिया कि फील्डर बने दर्शक और दर्शक बने फील्डर। ऐसा ही एक जुमला है उनका - चतुर, चालाक, चंचल चहल।

अपने छोटी-सी काया पर चहल ये तीनों विशेषण ढोए जा रहे हैं। और, इस साल तो उन्होंने कमाल ही कर दिया है। आईपीएल में उन्होंने सबसे ज़्यादा 27 विकेट झटके। इसमें एक हैटट्रिक समेत पांच विकेट भी शामिल है। यह फॉर्म उन्होंने टी-20 इंटरनैशनल में भी कायम रखी। दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ चार पारियों में 6 विकेट लिए। स्ट्राइक रेट केवल 14 और एवरेज 19 से थोड़ी अधिक। इंग्लैंड के विरुद्ध दो टी-20 में मौका मिला उन्हें। इसमें भी उन्होंने चार विकेट निकाले और इकॉनमी तो जबरदस्त रही, केवल सात की। इस प्रदर्शन के बाद चहल स्वाभाविक रूप से प्लेइंग 11 में जगह बनाते दिखते हैं और जब वह नहीं दिखे, तो फैंस का सवाल भी स्वाभाविक था।

Yuzvendra Chahal

डेब्यू के बाद से अभी तक चहल के लिए सबसे ख़राब दौर रहा साल 2021 का। तब उन्हें यूएई में हुए टी-20 विश्वकप में भी मौका नहीं मिला था। हालांकि वह वर्ल्ड कप भारतीय टीम के लिए भी भूलने वाला था। टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाई थी और तब कहा गया था कि चहल को नहीं खिलाने की क़ीमत चुकाई भारत ने। उस बुरे अनुभव और मौजूदा प्रदर्शन ने चहल को इस साल ऑस्ट्रेलिया में होने वाले टी-20 विश्वकप में खेलने का तगड़ा दावेदार बना दिया है।

चहल की सबसे बड़ी ख़ासियत है उनकी दिलेरी। तमाम क्रिकेट दिग्गज कहते हैं कि एक स्पिनर का दिलेर होना ज़रूरी है। जो छक्के खाए, पर डरे नहीं। बल्लेबाज को ललचाए और अपनी फिरकी में फंसाए।

चहल को यह काम बहुत खूब आता है। बोलिंग में उनका दिमाग चलता है चेस बोर्ड के सामने बैठे किसी खिलाड़ी की तरह। आखिर वह भी शतरंज के माहिर प्लेयर जो रह चुके हैं। शायद आपको पता हो कि चहल इकलौते भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने शतरंज और क्रिकेट, दोनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

वह अंडर-12 नैशनल चेस चैंपियन रह चुके हैं। फिर कोझिकोड में हुई एशियन यूथ चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। ग्रीस में आयोजित वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप में भी वह भारत के लिए बाजियां चल चुके हैं। लेकिन, यहां उनका करियर बहुत आगे नहीं बढ़ पाया। वजह थी स्पॉन्सर नहीं मिलना। शतरंज के रास्ते बंद हुए, तो चहल ने अपने दूसरे प्रिय खेल क्रिकेट में हाथ आजमाना शुरू कर दिया।

Yuzvendra Chahal

स्विच हिट शॉट की तरह चहल ने अपना करियर बदल लिया। वैसे उनके शतरंज से जुड़ने की कहानी भी कम अनोखी नहीं। चहल के पिता जींद के डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट कोर्ट में एडवोकेट हैं। ईमानदार छवि वाले। उन्हें चिंता हुई कि बेटा कहीं ग़लत संगत में न पड़ जाए। उन्हें बचाव का रास्ता सूझा शतरंज में। लगा कि एक बार बेटे को इसकी लत लग गई, तो फिर इसी में उलझा रहेगा। करियर भी बन जाएगा। बस इसीलिए उन्होंने बेटे को शतरंज में उलझाया था। लेकिन, युजी की किस्मत तो उनके नाम में लिखी थी।

महाराष्ट्र और सौराष्ट्र के लिए खेलने वाले एक खिलाड़ी थे यजुर्वेंद्र सिंह। चहल के पिता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने यजुर्वेंद्र के नाम को ही थोड़ा बदला और अपने बेटे का नाम रख दिया। आखिर में क्रिकेट खींच ही लाया चहल को अपने मैदान में।

64 खाने से 22 गज पर आने के बाद उन्हें पहली पहचान मिली साल 2013 में। चैंपियंस लीग टी-20 के फाइनल में उन्होंने तीन ओवर में केवल नौ रन देकर दो विकेट झटके थे। उनके प्रदर्शन से मुंबई इंडियंस की टीम जीत गई। हारने वाली टीम थी रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और बाद में इसी टीम ने चहल को अपने साथ जोड़ा। तब से युजवेंद्र चहल लगातार चालें चल रहे हैं और बैटर्स को मात दे रहे हैं।

आवाज़: गौरव तिवारी

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