यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • टी-20 में क्या विराट की जगह अपने आप बनती है?
  • क्या अब वक़्त आ गया है कि कोहली को ड्रॉप किया जाए?
  • सबसे छोटे फॉर्मेट में क्या अब फिट नहीं होते पूर्व कप्तान?
  • किन खिलाड़ियों से लेनी है विराट कोहली को होड़?

Virat Kohli on Rest Mode: इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले टी-20 में दीपक हुडा अपनी केवल दूसरी बॉल का सामना कर रहे थे। अनुभवी मोईन अली ने गेंद फेंकी और तड़ाक! लॉन्ग ऑन के ऊपर से लंबा छक्का। मोईन अली फिर लौटे, गेंद डाली। इस बार उससे भी बड़ा सिक्स और उसी दिशा में। अगला ओवर रीस टोपले का था। सारी गेंदें हुडा ने ही खेलीं। नंबर याद कर लीजिए - 0, 4, 2, 4, 2, 4 यानी कुल 16 रन। फ्लिक, पुल, स्लैश - सारे शॉट देखने को मिल गए इन आठ बॉल में।

ऐसी जबरदस्त पावर हिटिंग देख रहे भारतीय फैंस रोमांचित थे, लेकिन साथ में एक सवाल भी चल पड़ा। हुडा नंबर तीन पर खेल रहे थे। टी-20 और वनडे में यह पोजिशन तो विराट कोहली की है। अब विराट आएंगे, तो क्या हुडा बाहर होंगे? यह सवाल ऐसा भी हो सकता है, क्या हुडा को बाहर किया जा सकता है? दरअसल यह सवाल कम और डर ज़्यादा है। क्या याद आ रहा है कि पिछली बार विराट के फैंस को डर कब लगा था?

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भारत में पिछले साल जब बारिश का महीना चल रहा था, उस वक़्त इंग्लैंड में टीम इंडिया के सामने जो रूट की टीम किसी हारी हुई सेना की तरह लग रही थी। लॉर्डस की बालकनी से खड़े होकर जैसे एक जनरल की तरह विराट कोहली ने टीम इंडिया की अगुवाई की, उसे देखते हुए किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह बात करने का वक़्त इतनी जल्दी आ जाएगा। लेकिन, कुछ ही महीनों में स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।

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टीम इंडिया फिर इंग्लैंड में है, लेकिन इस बार हिंदुस्तान में अभी झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। बादल लगता है कि रूठे हुए हैं और उनके साथ विराट कोहली का बल्ला भी। साल 2021 के अगस्त-सितंबर इंग्लैंड टूर पर भी विराट की फॉर्म गायब थी, लेकिन तब वह कप्तान थे। अब न तो वह कप्तान हैं और न ही बैटर वाली भूमिका पूरी कर पा रहे हैं। इसी वजह से सवाल पूछा जा रहा है कि टीम में कैसे बनती है विराट की जगह?

इस बार सवाल कपिल देव की ओर से आया है। उन्होंने कहा है कि केवल रेपुटेशन के आधार पर किसी खिलाड़ी की जगह टीम में पक्की नहीं हो जाती। वर्तमान फॉर्म भी देखनी पड़ती है। 'आप स्थापित खिलाड़ी हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पांच लगातार मैचों में फेल होने के बाद भी आपको मौके दिए जाएं। अभी विराट कोहली उस कोहली की तरह नहीं खेल रहे, जिसे हम जानते हैं, जो अपने प्रदर्शन से लीजेंड बना। यदि विराट अच्छा नहीं कर पा रहे हैं, तो आप नए खिलाड़ियों को बाहर नहीं बैठा सकते।'

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कपिल का सबसे बड़ा और चुभता सवाल है, 'अगर दुनिया के दूसरे नंबर के टेस्ट बोलर रविचंद्रन अश्विन टेस्ट टीम से बाहर हो सकते हैं, तो आपके नंबर वन बैटर भी ड्रॉप किए जा सकते हैं।'

खेल के तीनों फॉर्मेट में विराट संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन टेस्ट में उनकी पोजिशन को लेकर अभी तक अंगुली नहीं उठाई गई। शायद वजह यह है कि वहां कप्तान नहीं होने के बावजूद एक खिलाड़ी के तौर पर उनकी मौजूदगी बहुत असर डालती है। पर, टी-20 में बात अलग है। सिलेक्टर्स ने हाल-फिलहाल बैटिंग में कई सारे नए चेहरे आजमाए हैं - दीपक हुडा, वेंकटेश अय्यर, ईशान किशन। अभी कई बाहर बैठे हुए हैं - केएल राहुल, शिखर धवन, मयंक अग्रवाल और कई को इंतज़ार है कि उन्हें कब मौका मिलेगा - पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल।

सबसे छोटे फॉर्मेट में जगह बनाने के लिए विराट को इनसे होड़ लेनी है। संयोग से आंकड़े उनका बहुत साथ नहीं देते। विराट का टी-20 करियर स्ट्राइक रेट है 137 का और औसत 51 से अधिक। हालांकि पिछले दो साल में इसमें गिरावट आई है। उन्होंने साल 2021 में 8 पारियों में 299 रन बनाए। इसमें एक पारी नाबाद 80 रनों की है और इसी वजह से एवरेज 74 से ऊपर की दिखती है। स्ट्राइक रेट लेकिन केवल 132 का। इस साल तो बैटिंग औसत करीब-करीब आधी हो गई और स्ट्राइक रेट ने और गोता लगा लिया, 127 पर पहुंच गया।

आईपीएल 2022 का सीजन सबसे बुरे टूर्नामेंट में से एक रहा उनके लिए। 16 मुक़ाबलों में उन्होंने केवल 341 रन बनाए। औसत रही करीब 23 और स्ट्राइक रेट 115 से जरा ऊपर। दो पचास आए। साथ में तीन गोल्डन डक।

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टी-20 में औसत के मामले में विराट अब भी दूसरों से बहुत आगे हैं, पर 20 ओवर के खेल में औसत बहुत मायने नहीं रखती। साउथैम्पटन मुक़ाबला इसका उदाहरण है। वहां केवल हार्दिक पंड्या ने फिफ्टी जमाई और वह भी डेढ़ सौ से अधिक के स्ट्राइक रेट से। बाकी बैटर्स ने छोटी-छोटी, लेकिन तेज़ पारियां खेलीं और टीम 198 के बड़े स्कोर तक पहुंच गई।

खेल जिस तरह तेज़ी से बदला है, वहां पहली गेंद से बोलर्स पर हावी होने की ज़रूरत है। अगर याद करें तो कुछ इसी तर्क के सहारे शिखर धवन को बाहर बैठाने को जायज बताया जा रहा था। फिर वही पैमाना विराट पर क्यों नहीं लागू हो सकता? उन्हें जिन खिलाड़ियों से टक्कर लेनी है, उनमें केएल राहुल 142, सूर्यकुमार यादव 170 से अधिक, श्रेयस अय्यर करीब 140 और दिनेश कार्तिक 145 के स्ट्राइक रेट वाले खिलाड़ी हैं। हुडा को अभी किनारे कीजिए, जो 170 से अधिक के स्ट्राइक रेट से खेल रहे हैं।

एशिया कप और टी-20 विश्वकप में बहुत ज़्यादा समय नहीं रह गया। एशिया कप से पहले भारत को केवल वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ 5 टी-20 खेलने है। फिर अक्टूबर-नवंबर में वर्ल्ड कप से पहले ऑस्ट्रेलिया के साथ तीन टी-20 होने हैं। बीसीसीआई के सूत्रों के मुताबिक, विराट ने वेस्टइंडीज सीरीज से कंप्लीट रेस्ट मांगा है। इसका मतलब, एशिया कप की टीम में उनको जगह देने के बारे में सोचने के लिए बस इंग्लैंड सीरीज बचती है।

जाहिर है कि विराट और सिलेक्टर्स, दोनों पर दबाव है। फैंस, पूर्व क्रिकेटर्स, एक्सपर्ट - सभी को भरोसा है कि विराट इस दबाव से बाहर निकल आएंगे। उनके सामने एक उदाहरण भी है, दिनेश कार्तिक का। पिछली बार जब इंग्लैंड में विराट मैदान पर टीम को लीड कर रहे थे, तब डीके कमेंट्री बॉक्स में बैठे हुए थे। वह खेल को दूर से देख रहे थे, लेकिन संन्यास नहीं लिया था। जिस दौरान विराट कोहली का ग्राफ नीचे आया, उसी दौरान दिनेश कार्तिक ऊपर चढ़े। डीके का वही फॉर्म्युला अब वीके को अपनाना है।

आवाज़ : शबनम

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