यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • क्रिकेट के बदलते दौर को समझने के लिए
  • किस तरह आकर्षण खो रहा वनडे फॉर्मेट?
  • अश्विन ने वनडे को लेकर क्या चिंता जताई?
  • क्या हो सकती है 50 ओवर के खेल की वापसी?

यह भी सुनें या पढ़ें: किसकी सुनें और किसकी मानें विराट कोहली
यह भी सुनें या पढ़ें : हमारे जुनून का शिकार हो रहे विराट कोहली
यह भी सुनें या पढ़ें :
भारतीय क्रिकेट में क्या जलनखोर भरे हैं?

'मेरे लिए तीनों फॉर्मेट में खेलना संभव नहीं है। मैं अपना सबकुछ अब टेस्ट क्रिकेट में झोंक दूंगा। मुझे लगता है कि इस निर्णय से मैं टी-20 फॉर्मेट पर ज़्यादा ध्यान दे सकूंगा।' इंग्लैंड के टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने 50 ओवर के खेल से संन्यास लेते हुए यह बात कही थी। उनका बयान इस ओर इशारा करता है कि वनडे अब अपना आकर्षण खो रहा है।

गौर करने वाली बात है कि स्टोक्स का संन्यास भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के एक बयान के कुछ अरसे बाद ही आया। अश्विन ने भी वनडे की बोरियत की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया था कि वह कुछ वक़्त के बाद टीवी बंद कर देते हैं। 'मुझे लगता है कि खेल के इस फॉर्मेट के लिए यह बहुत ख़तरनाक बात है। उतार-चढ़ाव ख़त्म होने के बाद यह गेम क्रिकेट का नहीं रहता। यह बस टी-20 फॉर्मेट का बड़ा रूप हो जाता है।'

अश्विन और स्टोक्स, दोनों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए वनडे संघर्ष कर रहा है। चिंता की बात है कि कुछ ऐसे ही ख्यालात पाकिस्तान के पूर्व तेज़ गेंदबाज वसीम अकरम के भी हैं। उनका कहना है कि वनडे इंटरनैशनल अब भराऊ चीज़ बनकर रह गए हैं और खेल प्रशासकों को क्रिकेट के भले के लिए इस फॉर्मेट को ख़त्म कर देना चाहिए।

One Day Cricket Losing Charm

पहले केवल टेस्ट मैच खेले जाते थे। फिर वनडे की शुरुआत हुई। इसे पांच दिन के खेल के छोटे और तेज़ रफ्तार फॉर्मेट के रूप में लाया गया था। फिर ऐसा वक़्त आया कि यह टेस्ट और टी-20 के बीच की कड़ी बनकर रह गया। लेकिन, समय के साथ इसने अपनी चमक खो दी। न तो इसमें टेस्ट की तरह जोर-आजमाइश होती है और न ही टी-20 जैसी रफ्तार है। बल्कि देखा जाए तो पिछले कुछ बरसों में टेस्ट क्रिकेट की जोरदार वापसी हुई है। घर के बाहर टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन, रिजल्ट की गारंटी और तेज़ रेन रेट ने इस फॉर्मेट के दर्शक बढ़ा दिए हैं।

दूसरी ओर, वनडे के साथ उल्टा ही हुआ। एक ही गति से आगे बढ़ता गेम नीरस लगने लगता है। अश्विन को लगता है कि इस नीरसता को ख़त्म किया जा सकता है। इसके लिए वापस एक पारी में एक गेंद वाले नियम की ओर लौटना होगा। इससे स्पिनर्स का रोल बढ़ेगा। साथ ही रिवर्स स्विंग की वापसी होगी। खेल में रोचकता आ सकती है इससे।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने एक दशक पहले एक पारी में दो गेंद का फॉर्म्युला इजाद किया था। अभी दोनों छोर से दो नई गेंद से खेल होता है। इसने वनडे को बैटर्स के पक्ष में झुका दिया है, जबकि टी-20 आने के बाद वैसे भी खेल बैटिंग करने वाले का ज़्यादा हो चुका है।

अश्विन ही नहीं, भारत के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर और न्यूज़ीलैंड के पेसर ट्रेंट बोल्ट भी दो गेंद के नियम से असहमति जता चुके हैं। वहीं, सचिन तेंडुलकर ने बैट और बॉल के बीच संतुलन के लिए एक बार सुझाव दिया था कि वनडे में भी टेस्ट की तरह चार पारियां खेली जाएं।

avichandran Ashwin's statement on ODI

इन दिग्गज खिलाड़ियों की चिंता और समझ आती है, जब हम ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के आंकड़े देखते हैं। इनसे पता चलता है कि 2017 में वनडे की व्यूअरशिप करीब 70 करोड़ थी, जो 2018 में घटकर 37 करोड़ से कम रह गई। वहीं, टेस्ट की बात करें, तो इसी दौरान दर्शकों की संख्या करीब 20 करोड़ से बढ़कर 21 करोड़ से अधिक हो गई।

आईसीसी की ओर से जारी आंकड़े भी इसी तरह की कहानी कहते हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने 2021 के टी-20 विश्वकप के लिए फेसबुक के साथ पार्टनरशिप की थी। इस वर्ल्ड कप को 4.3 अरब व्यू मिले। दूसरी ओर, 2019 के वनडे विश्वकप को केवल 3.6 अरब व्यू मिले थे।

अश्विन और स्टोक्स के बयान ऐसे समय आए हैं, जब वनडे और टी-20 के बीच का अंतर मिटता जा रहा है। भारत और इंग्लैंड के बीच हालिया टी-20 और वनडे सीरीज का उदाहरण लीजिए। टी-20 शृंखला के पहले मैच में भारत ने 198 रन बनाए थे और मुक़ाबला जीता। दूसरे मैच में भी भारत का स्कोर ही ज़्यादा रहा, 170 रन। तीसरे टी-20 में इंग्लैंड ने 215 रन बनाकर जीत हासिल की। अब जरा वनडे को देख लीजिए। पहला मैच भारतीय टीम 114 रन बनाकर जीती। दूसरे में इंग्लैंड ने 246 रन बनाए थे और जीत गई। तीसरे मैच में भारत ने 261 रन स्कोर कर शृंखला अपने नाम कर ली।

दोनों सीरीज में एक पारी में जो सबसे ज़्यादा रन बने, उसकी तुलना करने पर दिखता है कि अंतर कोई बहुत ज़्यादा नहीं है। वनडे के पास हर पारी में 30 ओवर ज़्यादा होते हैं, लेकिन इसका असर स्कोर पर नहीं दिख रहा।

वनडे किस तरह बैटिंग की ओर झुक गया है, इसका पता हाल में बने स्कोर से भी चलता है। 50 ओवर के खेल के इतिहास में पांच में से चार हाइएस्ट टीम स्कोर 2015 के बाद आए हैं। इस साल जून में ही इंग्लैंड ने नीदरलैंड्स के ख़िलाफ़ चार विकेट पर 498 रन बना दिए। अगर कोई तर्क देता है कि विरोधी कमजोर था, तो अगले स्कोर की ओर देखिए। इंग्लैंड ने ही 2016 में पाकिस्तान के विरुद्ध 444 रन और 2018 में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 481 रन बनाए थे।

avichandran Ashwin's statement on ODI

बैटिंग के जिन नए तौर-तरीकों ने वनडे से आकर्षण छीना है, उन्हीं ने टेस्ट को नया जीवन दे दिया है। दुनियाभर में होने वाली टी-20 लीग ने बैटर्स को 360 डिग्री वाली काबिलियत दे दी है। गैर पारंपरिक शॉट खेलने की क्षमता और वे इसका इस्तेमाल बिना हिचक टेस्ट में भी करते हैं। इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड के बीच हुई हालिया टेस्ट सीरीज में चार के औसत से रन बने। हालांकि इस एवरेज की असल वजह रही इंग्लैंड की बैटिंग स्टाइल, जिसे उसके नए कोच ब्रैंडन मैक्कलम ने बदला है।

न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टेस्ट में तो इंग्लैंड ने 4.2 रन प्रति ओवर की रफ्तार से 539 रन बना दिए। यही नहीं, चौथी पारी में 50 ओवर में ही 299 का लक्ष्य पा लिया। आखिरी टेस्ट में इंग्लैंड ने सवा पांच से अधिक की औसत से 360 रन बनाए। दोबारा खेलते हुए इंग्लिश बैटर्स की रफ्तार और तेज़ रही। लगभग साढ़े 5 की औसत से 296 रन। इंग्लैंड ने तीनों टेस्ट जीते। जो रूट ने इस सीरीज में करीब 75 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग की और जॉनी बेयरस्टो ने 120 की स्ट्राइक रेट से। इन दोनों का टेस्ट करियर स्ट्राइक रेट इससे बहुत नीचे है।

न्यूज़ीलैंड के ट्रेंट बोल्ट ने एक जगह वनडे फॉर्मेट पर बात करते हुए कहा, 'हमारे यहां आमतौर पर रग्बी के ग्राउंड पर ड्रॉप-इन पिच का इस्तेमाल होता है क्रिकेट खेलने के लिए। इस पिच पर गेंद घूमती नहीं। आप देखते हैं कि एक टीम 312 रन बनाती है और दूसरी टीम 47 ओवर के अंदर इस लक्ष्य को पा लेती है। तब आपको लगता है कि मेरे 6 घंटे कहां खो गए? मैं बॉल को घूमते देखना पसंद करूंगा।'

दक्षिण अफ्रीका ने 2023 में ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाली वनडे सीरीज रद्द कर दी है ताकि अपनी नई घरेलू टी-20 शृंखला पर फोकस कर सके। बीसीसीआई को भी आईपीएल के लिए ज़्यादा बड़ी विंडो चाहिए। इन चीज़ों से वनडे के भविष्य पर संदेह और गहराता है।

ऐसे में जब आप स्टोक्स के फैसले को देखते हैं, तो कारण समझ आने लगता है। टेस्ट फॉर्मेट परंपरा, इतिहास, गौरव और स्किल से जुड़ा है। दूसरी ओर, टी-20 के ज़रिए खिलाड़ी कम मेहनत करके ज़्यादा पैसा कमा सकते हैं। वनडे के पास क्या बचता है?

आवाज़ : मोहित सिन्हा


आलेख रेट करें

आज ही न्यूजलेटर और नोटिफिकेशंस को सब्सक्राइब करें

हिन्दी हैं हम! भारत की दुनिया, दुनिया में भारत

Copyright @2022 BCCL. All Rights Reserved