यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • किस तरह की मुश्किल में घिरी थी श्रीलंका की क्रिकेट टीम?
  • किसने दिया जीत के रास्ते पर वापसी का रोडमैप?
  • श्रीलंकाई क्रिकेट में किस तरह का बदलाव आया है?
  • अपनी क्रिकेट टीम से किस तरह प्रेरणा ले सकता है श्रीलंका?

यह भी सुनें या पढ़ें : 6 युवाओं ने श्रीलंका को दिलाई राजपक्षे परिवार से मुक्ति
यह भी सुनें : क्या पड़ोसी मुल्क को डूबने से बचा सकता है भारत?


चारों ओर से निराशा के सागर में घिरे श्रीलंका के निवासियों को अपना सबकुछ डूबता हुआ-सा नज़र आ रहा होगा। इस बेहद मुश्किल घड़ी में उनको उम्मीद की रोशनी दिखाने वाला भी कोई नहीं दिख रहा। क्या होगा इस खूबसूरत द्वीप का भविष्य? क्या यह यूं ही तबाह हो जाएगा या फिर कभी इसके दिन बहुरेंगे? कौन निकालेगा उसको इस महामुसीबत के दौर से? ये तमाम सवाल श्रीलंका के बाहर के लोगों के जेहन में भी होंगे। इस घुप्प अंधेरे वाली स्थिति में जब श्रीलंकावासियों के सवालों का जवाब किसी के पास नहीं है, तब वे अपनी क्रिकेट टीम से प्रेरणा ले सकते हैं।

याद कीजिए, कुछ साल पहले तक श्रीलंका की क्रिकेट टीम दुनिया के किसी भी देश के लिए बहुत बड़ी चुनौती हुआ करती थी। वनडे वर्ल्ड कप, टी-20 वर्ल्ड कप, चैंपियंस ट्रोफी, एशिया कप - सब कुछ जीत चुकी श्रीलंका के पास महान मुथैया मुरलीधरन, कुमार संगाकारा, माहेला जयवर्धने, लसिथ मलिंगा जैसे खिलाड़ी हुआ करते थे। जग जीतने वाली इस टीम के लिए 2015 के बाद से इतने बुरे दिन आ गए कि यह अपनी धरती पर भी हारने लगी। जून 2016 से पिछले महीने तक के आंकड़े बताते हैं कि श्रीलंका ने पांच साल के दौरान 68 में से सिर्फ 25 टेस्ट जीते, 122 वनडे में से केवल 42 में जीत हासिल की। टी-20 में तो सबसे बुरा हाल रहा। इस फॉर्मेट में उसने 92 में से 62 मैच गंवाए।

Sri Lanka cricket team

बीते वर्षों में श्रीलंकाई क्रिकेट के अवसान की कई वजहें रहीं। एक के बाद एक दिग्गज क्रिकेटरों का रिटायर होना, क्रिकेट बोर्ड के अंदर की राजनीति, खिलाड़ियों और क्रिकेट बोर्ड के बीच टकराव के अलावा समय रहते नई पौध तैयार करने में नाकामी। यही वजह रही कि यह टॉप क्लास टीम टेस्ट, वनडे और टी-20 की रैंकिंग्स में आठवें, नौवें स्थान तक फिसल गई। इंटरनैशनल क्रिकेट काउंसिल की खिलाड़ियों की रैंकिंग्स में श्रीलंकाई खिलाड़ी ढूंढे नहीं मिलते। श्रीलंका की पॉलिटिक्स भी कुछ इसी तरह की रही और इसी का नतीजा हुआ कि एक खुशहाल देश बर्बादी की तरफ फिसलता चला गया।

तमाम परेशानियों के बावजूद क्रिकेट के प्रति श्रीलंकावासियों का अगाध प्रेम कायम रहा है। यही वजह है कि जब देशभर में राष्ट्रपति और सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन चरम पर था, तब भी क्रिकेट का खेल जारी रहा। गॉल में जब ऑस्ट्रेलिया की टीम टेस्ट मैच खेल रही थी, तो कुछ प्रदर्शनकारी झंडे-बैनर लेकर वहां भी पहुंचे, लेकिन उनका मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना या फिर खेल को रोकने का नहीं था। वो उस वक़्त सिर्फ उस मंच का इस्तेमाल करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से दुनिया तक अपना संदेश पहुंचाना चाहते थे। मैचों के दौरान स्टेडियम में दर्शक भी पूरी तादाद में पहुंचे।

Sri Lanka cricket team

इस बेहद बुरे दौर के बीच श्रीलंका की क्रिकेट टीम ने देशवासियों को खुश होने के कई मौके दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया को वनडे सीरीज में हराना और फिर टेस्ट सीरीज में पहला मैच गंवाने के बाद शानदार वापसी करते हुए दूसरा पारी से जीतना, इससे पहले बांग्लादेश को उसकी धरती पर टेस्ट सीरीज में हराना। अभी कुछ महीनों पहले तक एक अदद इलेवन बनाने के लिए संघर्ष करती इस टीम को आज कई 'मैच विनर' मिल गए हैं।

दिग्गज दिनेश चांदीमल ने लय पकड़ ली है, तो टेस्ट कैप्टन दिमुथ करुणारत्ने ने आईसीसी की टेस्ट रैंकिंग्स में टॉप-10 में जगह बना ली है। अपनी पहली तीन टेस्ट इनिंग्स में पांच-पांच से अधिक विकेट लेकर इतिहास रचने वाले स्पिनर प्रभात जयसूर्या को समझना बल्लेबाजों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है। कुसल मेंडिस का बल्ला बोल रहा है। चरित असालंका, धनंजय डीसिल्वा और महीष तीक्षणा ने भी अपने-अपने हुनर से अपनी पहचान कायम कर ली है। कुछ खिलाड़ियों ने तो आईपीएल समेत कुछ विदेशी टी-20 लीग्स में भी अपनी जगह बना ली है।

Sri Lanka economic political crisis, ICC oneday t-20 rankings

श्रीलंका को ये सफलताएं अचानक नहीं मिलने लगी हैं। तमाम उठापटक के बीच उसने ढाई साल पहले मिकी आर्थर को हेड कोच नियुक्त करके एक सार्थक क़दम उठाया। साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान की टीमों के साथ काम करने और उनकी कई सफलताओं के सूत्रधार रहे आर्थर को एक अच्छा रणनीतिकार माना जाता है। आर्थर ने श्रीलंका क्रिकेट को बता दिया कि वह घरेलू क्रिकेट पर फोकस करते हुए एक टैलंट पूल बनाएंगे। उन्होंने वैसा ही किया और देशभर से चुने क्रिकेटर्स का एक बड़ा पूल बनाते यह ध्यान रखा कि वैसे स्थापित खिलाड़ियों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जाए, जिनमें टीम के लिए कुछ कर गुजरने का जज़्बा कायम है। हालांकि, आर्थर अब टीम के साथ नहीं हैं, लेकिन श्रीलंका के मौजूदा कोच क्रिस सिल्वरवुड को खिलाड़ियों का एक ऐसा उत्साही ग्रुप मिला है, जो चुनौतियों से लड़ने और पिछड़ने के बाद वापसी करना जानता है।

टेस्ट कप्तान दिमुथ करुणारत्ने को भी ज़रूरत के हिसाब से टीम में किसी खिलाड़ी को बुलाने की छूट मिली है। इसका ताज़ा उदाहरण प्रभात जयसूर्या का है। ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दो टेस्ट मैच की हालिया सीरीज में श्रीलंका की टीम पहला मैच बुरी तरह हार गई। दूसरे टेस्ट से पहले जब उसके चार खिलाड़ी कोविड पॉजिटिव हो गए, तो टीम की चिंताएं काफी बढ़ गईं। ऐसे मौके पर जब गॉल की स्पिन-फ्रेंडली पिच पर एक उम्दा फिरकी बोलर की ज़रूरत पड़ी तो कैप्टन ने अनजान प्रभात जयसूर्या को याद किया। प्रभात ने दोनों इनिंग्स में रेकॉर्ड छह-छह विकेट लेकर श्रीलंका को जीत दिलाई और प्लेयर ऑफ द मैच भी बने।

मैच के बाद कप्तान करुणारत्ने ने प्रभात को टीम में लेने की वजह बताई। उन्होंने कहा कि वह डोमेस्टिक क्रिकेट में प्रभात के साथ खेल चुके हैं और उन्हें पता था कि टर्निंग ट्रैक पर सफलता के लिए एक स्पिनर के पास जो कंट्रोल चाहिए, वह उनके पास है। प्रभात ने कप्तान के आकलन को सही साबित कर दिखाया। आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका को भी एक योग्य नेता और मार्गदर्शक चाहिए, बेहतर प्लानिंग चाहिए और सबसे बड़ी बात कि चुनौतियों से लड़ते हुए वापसी करने का जज़्बा चाहिए। श्रीलंकावासी अपनी ही राष्ट्रीय क्रिकेट टीम से प्रेरणा ले सकते हैं।

आवाज़ : संजीव कुमार

आलेख रेट करें

आज ही न्यूजलेटर और नोटिफिकेशंस को सब्सक्राइब करें

हिन्दी हैं हम! भारत की दुनिया, दुनिया में भारत

Copyright @2022 BCCL. All Rights Reserved