यह आलेख क्यों पढ़ें

  • मैच में वैसलीन इंग्लैंड को कैसे दागदार कर गई?
  • वीवीएस लक्षमण पर क्या लगा था इल्ज़ाम?
  • इंग्लिश मीडिया ने बिशन सिंह बेदी को क्यों निशाना बनाया?
  • वैसलीन से कैसे क्रिकेट में किया गया धोखा, जानिए

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संसद में भी गूंजा था क्रिकेट का वह विवाद

साल था 1976-77 का। इंग्लैंड की टीम चार टेस्ट मैच की श्रृंखला खेलने भारत आई थी। पहले दो टेस्ट मैच में टीम इंडिया को हार मिली। इन दोनों मैचों के दौरान एक ही नाम चर्चा में था और वो नाम था जॉन लीवर। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज़, जिसकी गेंदबाजी भारतीय बल्लेबाजों के लिए पहले बन चुकी थी। लीवर की गेंद दोनों तरफ से स्विंग होती और भारत बल्लेबाजों के लिए इसे पढ़ना मुश्किल हो रहा था। सीरीज़ का पहला टेस्ट मैच भारत पारी और 25 रन से हारा था। यह मुकाबला दिल्ली में खेला गया था। लीवर ने इस मैच में 10 विकेट अपने नाम किए। पहली बार लीवर को फेस कर रही टीम इंडिया को लगा कि अगले मैच में लीवर का तोड़ निकाल लिया जाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कोलकाता के इडेन गार्डेंस में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में भी टीम इंडिया को 10 विकेट से हार का सामना करना पड़ा।

अब बारी थी तीसरे टेस्ट की और लीवर की घातक गेंदबाजी का राज़ खुलने की। टेस्ट मैच से पहले भारतीय टीम के बल्लेबाज लीवर के खौफ में थे। उनकी हवा में रुख बदलती गेंद कब बल्लेबाजों को आउट कर जाती यह समझ से परे था। हुआ भी ऐसा ही भारतीय टीम लीवर की स्विंग के आगे बेसहारा नजर आई। पहली पारी में लीवर ने पांच और दूसरी पारी में दो विकेट चटकाए। भारत यह मुकाबला भी 200 रन से हार गया। तीसरे टेस्ट में मिली हार से ज्यादा चर्चा इस मैच के दौरान हुई एक घटना की हुई। ऐसा वाकया जिसे इंटरनैशनल क्रिकेट मैच में बॉल टेम्परिंग की पहली घटना करार दिया गया।

India in England

तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन जब भारत की बल्लेबाजी चल रही थी तो उस समय बिशन सिंह बेदी नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े थे। बॉलिंग मार्क पर थे जॉन लीवर। उनकी गेंदों ने भारतीय बल्लेबाजों को इतना परेशान कर रखा था कि बेदी ने एक टक उनपर निगाह रखी और जानना चाहा कि आखिर लीवर कर क्या रहे हैं जो उन्हें इतनी स्विंग मिल रही है। बेदी ने देखा कि लीवर जब रनअप के लिए जाते हैं तो स्टंप के पास पड़ी एक स्ट्रिप में से एक चिपचिपी चीज़ निकालकर माथे पर लगाते हैं। लीवर ऐसा हर थोड़ी देर पर करते। और बेदी की नजर उनपर होती।

बेदी जब आश्वस्त हो गए कि दाल में कुछ तो काला जरूर है तो उन्होंने इसकी शिकायत अंपायर से की। अंपायर ने लीवर को बुलाया और पूछताछ की साथ ही उस स्ट्रिप की भी जांच की। पता चला की स्ट्रिप में वैसलीन है। जब इसका कारण पूछा गया तो लीवर के पास इसका जवाब यह था कि वह जब गेंदबाजी करते हैं तो उन्हें बहुत पसीना होता है जो माथे से होकर आंखों में चला जाता है जिससे उन्हें दिक्कत होती है। इसलिए वह यह वैसलीन अपने आइब्रो पर लगाते हैं ताकि पसीना आंखों में ना जाए। अंपायर लीवर की बात मान भी जाते लेकिन लगातार दो हार से बौखलाए टीम इंडिया के कप्तान बिशन सिंह बेदी आग बबूला थे।

उन्होंने कहा कि पसीना रोकने के लिए माथे पर वैसलीन लगाना महज दिखावा है। हकीकत यह है कि वह माथे और आइब्रो की वैसलीन गेंद पर लगाकर गेंद को चमका रहे हैं ताकि उन्हें एक्स्ट्रा स्विंग मिले। यह वजह है कि वह और गेंदबाजों की तुलना में भारतीय बल्लेबाजों को ज्यादा परेशान कर रहे हैं। बेदी के आरोप पर इंग्लैंड की टीम भी चुप नहीं रही। तत्कालीन कप्तान टोनी ग्रेग लीवर के बचाव में उतरे उन्होंने कहा कि बेदी हार की वजह से बेचैन हैं और इसी वजह से वे ऐसा उल्टा सीधा आरोप लगा रहे हैं। जैसे तैसे यह मैच आगे बढ़ा और भारत को हार मिली। लेकिन इस मैच ने भारत और इंग्लैंड के बीच खटास डाल दी। दोनों मुल्कों के अख़बार अपनी-अपनी टीमों के पक्ष में खड़े हो गए। खूब सारे लेख लिए गए इंग्लिश मीडिया ने बेदी पर जमकर निशाना साधा।

Nottingham test Match 2011

इस सबके बीच बेंगलुरु में चौथा टेस्ट मैच खेला गया। भारत ने यह मुकाबला 140 रनों से जीत लिया। लेकिन वैसलीन कांड अब भी सुर्खियों में था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का वर्चस्व उस समय इतना नहीं था जितना अब है। बेदी के साथ बोर्ड भी खड़ा नहीं हुआ। बीसीसीआई उनसे किनारा करता नजर आया। बहुत दबाव के बाद बीसीसीआई ने उस वैसलीन स्ट्रिप को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा, हालांकि उस जांच का कोई नतीजा नहीं निकला। गेंद से छेड़छाड़ की आवाज़ उठाने के एवज में बेदी को एक और नुकसान उठाना पड़ा। बेदी का काउंटी क्रिकेट का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया। इन सबके बाद भी बेदी अपनी बात पर अड़े रहे। कई सालों बाद इंग्लैंड के कप्तान टोनी ग्रेग ने यह बात मानी कि वैसलीन वाली घटना उनकी टीम की एक गलती थी। हालांकि उनका यह कहना था कि उस दिन गेंद पर वैसलीन लगाने की घटना टीम की गलती थी लेकिन इसका मकसद पसीने को रोकना ही था ना कि गेंद से छेड़छाड़ का।

यह तो कहानी रही साल 1976 की 35 साल एक बार फिर वैसलीन कांड जैसी ही एक घटना सामने आई। इस बार भी आमने-सामने भारत और इंग्लैंड की टीम थी। साल था 2011। नॉटिंघम में भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच खेला जा रहा था। भारत अपनी पहली पारी की बल्लेबाजी कर रहा था। स्कोर था 48 पर एक। वीवीएस लक्ष्मण ने 27 रन बनाकर क्रीज पर खड़े थे। जेम्स एंडरसन के नौवें ओवर में गेंद उनके बल्ले के नजदीक से गयी। एंडरसन समेत इंग्लैंड के सभी खिलाड़ियों ने स्टंप के पीछे कैच लिये जाने की अपील की और सभी मैदान पर इकट्ठे हो गये। अंपायर ने नॉट आउट करार दिया इसके बाद इंग्लैंड के कप्तान एंड्रयू स्ट्रॉस ने डीआरएस के इस्तेमाल के लिये कहा, लेकिन इससे भी मेजबान टीम को कोई फायदा नहीं हुआ।

India vs England Test Match

केविन पीटरसन और लक्ष्मण के बीच इसे लेकर थोड़ी कहासुनी भी हुई। लेकिन विवाद तो तब शुरू हुआ जब माइकल वॉन ने ट्वीट कर लक्ष्मण पर यह आरोप लगाया कि लक्ष्मण के बल्ले पर वैसलीन लगी थी जिसकी वजह से वो डीआरएस में बच गए। स्टुअर्ट ब्रॉड तो इससे भी एक कदम आगे निकले उन्होंने जाकर लक्ष्मण का बल्ला भी चेक किया कि कहीं उस पर किसी तरह की वैसलीन या तरल पदार्थ तो नहीं लगा हुआ है। ब्रॉड ने इस घटना पर कहा कि 'मुझे लगा था कि गेंद उनके बल्ले से लगी थी, लेकिन बल्ले पर कोई वैसलीन या तरल पदार्थ नहीं था। हॉट स्पॉट में किसी भी हल्के टच का पता नहीं चलता। यह एक किस्म का नुकसान है।'

इस विवाद पर सुर्खियों के बीच वीवीएस लक्ष्मण ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि 'मैं हैरान हूं कि बल्ले पर भी वैसलीन लगाई जा सकती है। गेंदबाज़ों को वैसलीन का इस्तेमाल करते सुना है कि लेकिन बल्ले पर मैंने वैसलीन लगाई यह पूरी तरह बकवास है। ब्रॉड के बैट चेक करने के बयान पर उन्होंने कहा कि ब्रॉड ने मेरा बल्ला नहीं चेक किया था, मुझे नहीं पता उन्होंने यह बयान मीडिया के सामने क्यों दिया।'

बाद में इस मामले को कोर्ट तक ले जाने की चर्चा होने लगी। कई पूर्व दिग्गजों ने वॉन के ट्वीट को बेकार करार दिया। मामले के कोर्ट ले जाने की चर्चा के बीच वॉन ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश में कहा था कि मुझे लगता है लोगों को सेंस ऑफ ह्यूमर की जरूरत है। वैसलीन वाले ट्वीट को इतनी गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था।

आवाज़ : रोहित उपाध्याय

Web Title:

ball tampering controversies using vaseline in cricket | Use of Vaseline in Cricket History | Laxman and Bedi on Vaseline | Incident when England used Vaseline to Win Match | History of Vaseline incident in Cricket | Bishen Singh Bedi on 1976 Vaseline Matter

(Hindi podcast on Navbharat Gold)

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