इंग्लैंड के ख़िलाफ़ (India vs England Lords ODI) दूसरे वनडे में युजवेंद्र चहल (Yuzendra Chahal) की फिरकी में इंग्लिश टीम फंस गई। युजी ने लगातार अच्छे प्रदर्शन से टी-20 विश्वकप (T-20 World Cup) के लिए दावा मजबूत कर लिया है। इस मौके पर वे दो घटनाएं, जिनके बारे में युजी ने ख़ुद बताया था। एक में तो उनकी जान पर बन आई थी

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'मार दूं?'
'हां, हां, मार दे। मैं देख लूंगा।' और वसीम अकरम ने सही में मार दिया, बाउंसर और वह भी विवियन रिचर्ड्स को। इसके बाद पास जाकर कुछ बुदबुदा भी आए। तब नया-नया जोश था। बोलिंग में तेज़ी थी। ऊपर से इमरान खान जैसे कप्तान का साथ मिला था। दूसरी ओर सर विव करियर के ढलान पर थे। उस मैच में क्रीज पर तुरंत ही आए हुए थे। फिर भी वह विव थे, तो उन्होंने वसीम को एक चेतावनी जारी की, 'मैन, डोन्ट डू दिस टू मी।' वसीम ने इसे नज़रअंदाज़ कर दिया और अगली बॉल पर फिर वही हरकत।

मैच ख़त्म हुआ। सारे पाकिस्तानी खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में इमरान के इर्द-गिर्द बैठकर गुरु मंत्र ले रहे थे। तभी किसी ने दरवाजे को भड़भड़ाना शुरू किया। वसीम दौड़ते हुए इमरान के पास आए, 'वह तो यहां तक आ गया।'
'कौन?'
'विव, और कौन?'
'तो मैं क्या करूं? तेरा मामला है, तू सुलट।'

यह मैच नहीं था, जहां कोई अंपायर होता और अब तो कप्तान ने भी दगा दे दिया था। अगले मिनट में वसीम पैरों पर पड़े थे विव के। माफी मांगते हुए, आगे से ऐसा नहीं होगा। बाद में इस वाकये को ख़ुद वसीम अकरम ने कई जगह सुनाया। हंसते हुए, एक मज़ाक़ की तरह। वसीम को यह स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं हुई कि अपने सामने सर विव को देखकर उनकी जान सूख गई थी।

मैच के बाद का ऐसा ही एक किस्सा भारतीय स्पिनर युजवेंद्र चहल ने भी साझा किया है। यह किस्सा भी मज़ाक़ का ही है, लेकिन जानलेवा। युजी ने 2013 की घटना बताई है, जब आईपीएल मुक़ाबले के बाद शराब के नशे में धुत एक साथी क्रिकेटर ने उन्हें 15वीं मंजिल की बालकनी से नीचे लटका दिया था। चहल तब मुंबई इंडियंस के लिए खेला करते थे और टीम के सबसे जूनियर खिलाड़ियों में से एक थे।

yuji chahal

युजी ने जो कहानी सुनाई, वह एकदम रोंगटे खड़ी करने वाली है। बालकनी से नीचे झूलता पूरा शरीर। बस किसी तरह उन्होंने अपनी बाहें उस नशेड़ी क्रिकेटर के गले में फंसा रखी थीं। गनीमत रही कि वहां और लोग आ गए और मामले को संभाल लिया। युजी का ही एक और किस्सा है 2011 का, जब मुंबई इंडियंस के उनके साथियों, जेम्स फ्रेंकलिन और एंड्रयू साइमंड्स ने उन्हें एक कमरे में रातभर के लिए बंद कर दिया था। दोनों ने चहल के हाथ-पैर बांधे, मुंह पर टेप चिपकाया और एक कमरे के कोने में डालकर चले गए। दोनों नशे में इतने धुत थे कि उन्हें आगे कुछ याद ही नहीं रहा। अगले दिन सुबह जब सफाई के लिए वह कमरा खोला गया, तो युजी को आज़ादी मिली।

इन दोनों घटनाओं को युजवेंद्र चहल ने हंसते-मुस्कुराते हुए बताया। पहले वाले केस में तो उस क्रिकेटर के नाम का भी खुलासा नहीं किया। दूसरे केस में इतना ज़रूर बताया कि फ्रेंकलिन और साइमंड्स ने उस रात के लिए उनसे कभी माफी नहीं मांगी। दोनों का कहना था कि नशे में ऐसी चीज़ें हो जाती हैं। दोनों सही कह रहे थे। क्रिकेट में या क्रिकेटर्स के साथ शराब के नशे में क्या-क्या नहीं हो जाता। ख़ुद साइमंड्स ही इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। आपने बिंज वॉचर सुना होगा, वह बिंज ड्रिंकर थे। ऑस्ट्रेलियाई टीम के ट्रेनिंग सेशन पर पीकर पहुंच गए। दो-तीन बॉल खेली और फिर कोने में जाकर लुढ़क गए। इसी पीने की लत ने उनका करियर समय से पहले ख़त्म कर दिया। न्यूज़ीलैंड के जेसी राइडर तो पीने के चक्कर में मरते-मरते बचे थे। एक पब में उनकी कुछ लोगों से कहासुनी हो गई। अब वह भारत था नहीं, जहां किसी क्रिकेटर का स्टारडम चलता। उन लोगों ने जेसी की कसकर धुनाई कर दी। हालत सीरियस हो गई और आखिरकार मैदान से ही विदा लेना पड़ा उनको।

yuji

वापस आईपीएल की ही बात करें, तो ललित मोदी के दौर में मैचों के बाद होने वाली पार्टियां नशे में डुबोने वाली होती थीं। इनमें मीडिया की एंट्री बैन रहती। फिर भी जो ख़बरें आईं, उनसे पता चलता है कि क्यों इन पार्टियों को बैन करना पड़ा। ऐसी ही किसी एक पार्टी में क्रिस गेल ने बॉलिवुड अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा के साथ डांस करते हुए अपनी शर्ट उतार दी थी। क्रिस गेल क्रिकेट के यूनिवर्सल बॉस कहे जाते हैं और तब उनकी आलोचना भी इसी स्तर की हुई।

क्रिकेट और शराब का कॉकटेल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं रहता। 2012 में वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के बीच मैच था। महाराष्ट्र के एक्साइज डिपार्टमेंट ने तब स्टेडियम के वीवीआईपी चैंबर्स से वाइन, शैंपेन, बीयर और वोडका की साढ़े आठ सौ से ज़्यादा बोतलें ज़ब्त की थीं। इनमें से अधिकतर इंपोर्टेड थीं, बेहद महंगी। नियम के अनुसार जितनी मात्रा में और जितनी देर तक शराब सर्व की जा सकती है, उसके बाद भी पीने-पिलाने का दौर चला था।

वैसे केवल शराब का ही नशा नहीं होता। कई बार इसके साथ ताकत का नशा भी मिल जाता है। संयोग से 2012 की ही बात है, जब कोलकाता नाइट राइडर्स के सह-मालिक बॉलिवुड स्टार शाहरुख खान वानखेड़े स्टेडियम में एक सुरक्षाकर्मी से भिड़ गए थे। केकेआर को मुंबई के ख़िलाफ़ मुंबई में जीत मिली थी। जश्न का माहौल था। बताया जाता है कि इसी जश्न में शाहरुख और उनके परिवार के कुछ लोग उन एरिया में जाने लगे, जहां केवल खिलाड़ी और मैच अधिकारी जा सकते हैं। सुरक्षाकर्मी ने रोका और शाहरुख लड़ने बैठ गए। मुंबई क्रिकेट असोसिएशन का आरोप था कि बॉलिवुड स्टार नशे की हालत में थे और सिक्योरिटी पर्सनल से बदतमीजी की। शाहरुख ने हालांकि बताया था कि उनकी बेटी को जबरन रोका गया। ऐसे में उन्होंने वही किया, जो एक पिता करता है। फिर भी उस घटना में शाहरुख हीरो नहीं बने। सीटी बजाकर किंग खान को बाहर जाने का इशारा करते हुए विकास दल्वी हीरो थे उस दिन के।

आवाज़ : रोहित उपाध्याय

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