यह आलेख क्यों पढ़े?

  • तुरंत नींद आने के लिए क्या करें?
  • रात को नींद नहीं आती तो क्या करें?
  • क्या सोते समय म्यूजिक सुनना फायदेमंद है?
  • उम्र के अनुसार कितनी देर सोना चाहिए?

किसी मोबाइल फोन की बैटरी जब फुल चार्ज हो जाती है तो एक खास समय तक काम कर सकती है। फिर धीरे-धीरे बैटरी डिस्चार्ज होती जाती है। जब वह डिस्चार्ज की तरफ पहुंचने वाली होती है तो हम उसे दोबारा चार्ज करते हैं। इसके बाद वह फिर से काम करने की स्थिति में पहुंचने लगती है। नींद भी हमारे लिए चार्जिंग की तरह ही है। अगर हमने पूरी नींद नहीं ली तो मोबाइल रूपी शरीर की जिंदगी कम हो जाएगी और हर दिन जल्दी डिस्चार्ज होने लगेगी। नींद की इसी अहमियत को समझने के लिए जाने-माने एक्सपर्ट्स से बात की:
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नींद में खलल क्यों पैदा होता है?
वजहें कई हो सकती हैं। इनमें मोबाइल, लैपटॉप, टीवी के साथ देर रात तक जागने की आदत, डिप्रेशन, तनाव, शरीर कमजोर होना, विटामिन-डी की कमी, सही और तय समय पर खाना न खाना, अल्कोहल और स्मोकिंग की आदत, जंक फूड, खर्राटे, बेड की क्वॉलिटी, मोटे तकिए पर सोना और स्लीप एप्नीया (सोते वक्त सांस लेने में रुकावट) जैसी समस्या को नजरअंदाज करना।

इसलिए जरूरी है पूरी नींद
कम नींद की वजह से क्या होता है, इसे फौरन ही महसूस किया जा सकता है। यह शरीर पर चोट लगने जैसा ही है। इसका असर फौरन ही दिखने लगता है। अधूरी नींद की वजह से चिड़चिड़ापन, ध्यान में कमी, हॉर्मोनल गड़बड़ियां, याद्दाश्त में कमी, बेचैनी, महिलाओं में माहवारी से जुड़ी परेशानी, शुगर, बीपी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाना, अगर शुगर, बीपी जैसी बीमारियों पहले से हो तो इन्हें काबू करने में परेशानी होना, इसकी वजह से रिश्ते खराब होना आदि।

उम्र के अनुसार चाहिए इतनी नींद
नींद वैसे तो जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए। यह भी मुमकिन है कि कोई शख्स 5 घंटे की गहरी नींद में अपनी जरूरत पूरी कर ले। वहीं दूसरे शख्स को इसके लिए 7 से 8 घंटे की जरूरत हो। फिर भी एक औसत नींद की जरूरत को हम उम्र के हिसाब से बता सकते हैं:

Children need the most sleep

ऐसे लाएं अच्छी नींद
1. स्क्रीन से दूरी बनाएं
आजकल सबसे बड़ी समस्या स्क्रीन है। अब से 20-25 साल पहले यह समस्या बहुत कम थी लेकिन मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर, इंटरनेट के सस्ता होने की वजह से लोग इनसे चिपके रहते हैं। नींद के समय में से वक्त लेकर इनका उपयोग करते हैं। इनकी वजह से आंखों और दिमाग में मौजूद नर्व सेल्स पर भी बुरा असर पड़ता है और हमारी नींद में जबर्दस्त खलल पड़ता है। बेड पर जाने से आधा घंटा पहले मोबाइल आदि से अलग होने की आदत डालें। साथ ही कमरे में रोशनी न हो या फिर कम हो।

2. बेड और तकिया सही रखें
अच्छी नींद के लिए बेड और तकिये की क्वॉलिटी का सही होना जरूरी है। इसमें कमी या फर्क पड़ने से नींद में खलल पड़ जाता है। यही वजह है कि जब हम किसी नई जगह पर या नए बेड और तकिये पर सोते हैं तो कई बार नींद में खलल पड़ जाता है। इसलिए बेड इतना सॉफ्ट भी न हो कि मांसपेशियों पर हल्का दबाव भी न पड़े और इतना सख्त भी न हो कि कुछ ज्यादा ही दबाव पड़ जाए। कुल मिलाकर अगर किसी को अच्छी नींद नहीं आ रही हो तो वह अपने बेड को भी बदलकर देख लें।

कई लोगों को मोटे तकिये लगाकर सोने की आदत होती है। अक्सर ऐसे लोग मोटापे का शिकार होते हैं। उनकी गर्दन में भी चर्बी जमा होती है। मोटे तकिये लगाने से उनकी गर्दन की मांसपेशियों को ज्यादा आराम मिलता है। लेकिन ज्यादा मोटे तकिये पर सोने से खर्राटे भी ज्यादा आते हैं। इसलिए तकिये की ऊंचाई 3 से 4 इंच तक ही ऊपर हो।

3. स्पाइनल बाथ भी फायदेमंद
अगर किसी को नींद में कमी की शिकायत है तो उसे स्पाइनल बाथ से फायदा हो सकता है। इसके लिए बाथ टब में गुनगुना पानी भरकर जांघ से लेकर गर्दन तक 10 से 15 मिनट तक डुबोकर रखना है। इस स्थिति में हमारे पैर और सिर दोनों पानी से बाहर होते हैं। इससे हमारी स्पाइनल कॉर्ड (मेरुदंड) और नर्व सेल्स को आराम मिलता है। इतना ही नहीं, इससे हमारे दिमाग को भी राहत मिलती है और अच्छी नींद आती है।

अरोमा थेरपी क्या है और नींद में यह कितना फायदेमंद है?
इसमें लैवेंडर तेल का इस्तेमाल किया जाता है। अच्छी नींद और सिरदर्द से राहत के लिए अपने तकिये पर लैवेंडर तेल की 2 बूंदें डाल दें। अगर सिरदर्द से फिर भी राहत न मिले और नींद न आए तो 4 चम्मच नारियल या बादाम तेल में 5 बूंदें लैवेंडर तेल मिलाकर सिर की मसाज करने से फायदा होता है। इससे मांसपेशियों को काफी आराम पहुंचता है। इतना ही नहीं। यह सूजन भी घटाता है।

Sleep Rules

क्या मसाज से अच्छी नींद आती है?
वैसे तो शरीर के थकने से अच्छी नींद आती है, लेकिन कई बार ज्यादा थकने से नींद में खलल भी पैदा हो जाता है। यह तब ज्यादा होता है जब थकने की वजह से पैर की मांसपेशियों में सूजन या दर्द हो। ऐसे में पैरों की मालिश की जाए तो नींद आ जाती है। इसके लिए गुनगुने सरसों के तेल से 2 से 3 मिनट तक मालिश करें। पैरों में कुछ खास प्रेशर पॉइंट होते हैं, जैसे अंगूठे के निचले हिस्से को दबाकर रखना चाहिए। नसों को आराम मिलता है।

ऐसा हो सोने का तरीका
पैरों को एक-दूसरे पर चढ़ाकर, घुटनों तक मोड़कर या फिर अपने हाथ को सिर के नीचे दबाकर नहीं सोना चाहिए। इससे भी नींद में खलल पड़ता है। वहीं हमारे देश में खर्राटे (स्नोरिंग) की समस्या काफी बढ़ चुकी है। शुगर और बीपी के बाद इसे ही सबसे बड़ी नॉन-कम्युनिकेबल बीमारी माना जाता है। यह सिर्फ खर्राटे तक ही सीमित नहीं है। इसके आगे बढ़ते हुए यह स्लीप एप्नीया (नींद में खर्राटों के साथ सांस में रुकावट आना) है। खर्राटे लेने के दौरान सांस रुकने की परेशानी कम होती है जबकि स्लीप एप्नीया में सांस भी रुकती रहती है। ऐसी परेशानियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

क्या होता है रात में देर से सोने का असर?
सीधा जवाब यह है कि जल्दी सोएं और जल्दी उठें। इस बीच में 6 से 8 घंटे की नींद जरूर लें। लेकिन अगर किसी का जॉब ही ऐसा हो जिसमें उसे रात में देर तक जागना पड़े तो वह देर से सोकर देर उठने की बजाय, सुबह उठ जाए और फिर फ्रेश होकर ब्रेकफस्ट करके दोबारा सो जाए। सुबह की ताजा हवा और सूरज की पहली किरण सेहत के लिए अच्छी है और ताजगी बनी रहती है।

Lack of sleep effects

नींद के लिए जरूरी काम
नींद का फिजिकल ऐक्टिविटी से क्या नाता है?
इन दोनों का आपस में सीधा संबंध है। ऐसा देखा गया है जिन्हें कम नींद की शिकायत है, वे जब फिजिकल ऐक्टिविटी करते हैं तो उन्हें अमूमन अच्छी नींद आती है। यहां इस बात को समझना भी जरूरी है कि सिर्फ फिजिकल ऐक्टिविटी से नींद नहीं आती। इसके अलावा मोबाइल और दूसरी स्क्रीन से सोने से आधा घंटा पहले दूरी भी बनाना भी जरूरी है।

क्या सोते समय म्यूजिक सुनना फायदेमंद है?
कुछ लोगों को धीमी आवाज में अपनी पसंद के गाने या संगीत सुनने से नींद आ जाती है। वहीं ऐसे लोग भी हैं जिन्हें जरा-सी आवाज होने पर भी नींद में खलल पड़ जाता है। यह व्यक्तिगत पसंद या आदत की बात है। एक अनुमान के मुताबिक 20 में से 1 शख्स ऐसा हो सकता है जिसे धीमी आवाज में संगीत सुनने से अच्छी नींद आती है। यह लगभग उसी तरह है जैसे बच्चे को उसके मम्मी, पापा, दादी, नानी आदि लोरी या कहानियां सुनाकर सुलाती हैं। ज्यादातर लोगों में बढ़ती उम्र के साथ यह आदत छूट जाती है।

क्या रात में सोने से पहले नहाना और पैर धोना अच्छा है?
सोने से पहले नहाने से कई लोगों को फायदा होता है। जब कोई शख्स रात में ऑफिस से घर आता है तो शरीर पर धूलकण की मौजूदगी रहती है। नहाने के बाद ये शरीर से हट जाते हैं और ताजगी आ जाती है। ताजगी हर चीज में अच्छी है।

दिन में पावर नैप क्या है और यह कितनी जरूरी है?
आमतौर पर पावर नैप की जरूरत इसलिए होती है कि रात में हमारी नींद पूरी नहीं हुई या हमने इतना हेवी खाना खा लिया जिस वजह से पेट के पास खून की उपलब्धता बढ़ जाती है। इसलिए दिमाग तक खून पहुंचना कम हो जाता है और हमें सुस्ती आने लगती है। आयुर्वेद और नेचरोपैथी में दिन में सोने की मनाही है। कहा गया है कि सोने का काम रात को ही करना चाहिए। फिर भी अगर पावर नैप लेने की बात है तो यह किसी भी हालत में 20 मिनट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। पावर नैप भी कुर्सी पर बैठकर ही लेना बेहतर है, बेड पर लेने से यह पूरी नींद में तब्दील हो जाती है। अलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा) में इसके लिए कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। पावर नैप लेने से कोई नुकसान नहीं होता।

आवाज़ : बबीता जैन

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