यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • किडनी से जुड़ी बीमारियों के बारे में जानने के लिए
  • किडनी का क्या काम है और यह खराब क्यों होती है?
  • इसके खराब होने पर किस तरह के लक्षण दिखते हैं?
  • किडनी का इलाज कराने में कितना खर्च होता है?

symptoms of kidney problems & Soultion: किडनी बेचकर महंगी चीज़ें खरीदने के बारे में काफी जोक्स बनते हैं। इसकी वजह है दुनियाभर में किडनी मरीजों की संख्या काफी अधिक होना। दरअसल, किडनी से जुड़ी बीमारियों में लापरवाही बरतने पर मामला काफी नाजुक हो जाता है। फिर ट्रांसप्लांट ही इकलौता रास्ता बचता है। लेकिन, डिमांड के मुक़ाबले किडनी पर्याप्त संख्या में नहीं मिलती। इसलिए इसकी क़ीमत काफी ज़्यादा होती है।

किडनी हमारे शरीर का एक बेहद ज़रूरी अंग है। यह ब्लड को फिल्टर करके ख़राब चीज़ों को ब्लैडर में भेजती है, जहां से वे यूरिन के साथ बाहर निकल जाते हैं। किडनी फेल होने पर विषाक्त पदार्थ खून से फिल्टर नहीं हो पाते और शरीर जानलेवा बीमारियों का घर बन जाता है। दुनियाभर में लाखों लोग किडनी से जुड़ी कई तरह की बीमारियों के साथ जीते हैं। इनमें से ज़्यादातर को तो बीमारी की भनक भी नहीं होती। यही वजह है कि किडनी की बीमारी को अक्सर साइलेंट किलर भी कहा जाता है।

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किडनी खराब होने के कई कारण होते हैं। अमूमन यह लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों यानी डायबिटीज, हाइपरटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर के चलते डैमेज होती है। कई बार जन्मजात दिक्कतों के चलते भी किडनी खराब हो जाती है। अगर लक्षणों की बात करें, तो किडनी के मरीजों को भूख काफी कम लगती है, क्योंकि उनका शरीर वेस्टेज को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पाता। पैर और टखने में सूजन भी आ जाती है। त्वचा में खुजली और सूखापन दिखने लगता है। हर वक़्त कमजोरी और थकान बनी रहती है। पेशाब कई बार या फिर काफी कम बार आती है।

Kidney treatment cost

किडनी को खराब होने से बचाने के लिए समय-समय पर जांच कराना ज़रूरी है। बीमारी का पता जितनी जल्दी चलेगा, इलाज में उतनी ही आसानी होगी। हाई ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल लेवल के मरीजों में किडनी के जल्दी खराब होने का जोखिम अधिक रहता है। इन लोगों को अपनी सेहत पर ख़ास नज़र रखनी चाहिए। भारत में किडनी से जुड़ी सबसे आम बीमारी क्रोनिक किडनी रोग यानी सीकेडी है। वहीं, अन्य बीमारियों में किडनी स्टोन, प्रोस्टेट और यूरिनरी ट्रैक्ट प्रॉब्लम शामिल हैं।

दूसरी बीमारियों के जैसे किडनी के इलाज में भी चार तरह की लागत शामिल होती है। पहले में होती कंसल्टेशन फीस यानी डॉक्टर से सलाह मशविरे का खर्च। सामान्य डॉक्टर जहां 500 से एक हज़ार रुपये तक चार्ज करते हैं, वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट (Nephrologist) यानी किडनी के विशेषज्ञ एक हज़ार से दो हज़ार रुपये तक लेते हैं। अगर डॉक्टर को कुछ गड़बड़ी दिखती है, तो मरीज का टेस्ट किया जाता है। फिर बीमारी का पता चलने पर इलाज शुरू होता है और आखिर में इलाज के बाद डॉक्टरी देखरेख की ज़रूरत पड़ती है।

किडनी से जुड़ी सभी समस्याओं के लिए दो तरह के टेस्ट होते हैं- पहला ब्लड टेस्ट और दूसरा किडनी की इमेजिंग। शुरुआत में किडनी फंक्शन टेस्ट, कंप्लीट ब्लड काउंट और यूरिन टेस्ट होते हैं। इसमें कुल 1 हज़ार से डेढ़ हज़ार रुपये खर्च होते हैं। इतने में पता लग जाता है कि किडनी में कोई समस्या है या नहीं। अगर समस्या होती है तो फिर मरीज का रेडियोलॉजी टेस्ट होते है। इसमें ख़ास समस्या का पता लगाने के लिए स्कैन किए जाते हैं। अगर अल्ट्रासाउंड में कुछ गड़बड़ी दिखती है, तो सीटी स्कैन और एमआरआई कराया जाता है। अल्ट्रासाउंड 500 रुपये में होता है। वहीं, सीटी स्कैन के लिए 3 से 5 और एमआरआई के लिए 5 से 12 हज़ार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।

इतनी जांच के बाद पता चल जाता है कि बीमारी कितनी गंभीर है और उसका इलाज कैसे करना है। किडनी के इलाज के अलग-अलग तरीके हैं और उनकी लागत में भी काफी अंतर है। हम किडनी की कुछ बीमारियों और उनके में होने वाले खर्च के बारे में बता रहे हैं :

एक्यूट किडनी इंजरी (Acute kidney injury)
अगर किडनी अचानक से काम करना बंद कर दे या फिर सही तरीके से काम न करे, तो उसे एक्यूट किडनी इंजरी कहते हैं। यह समस्या अमूमन उन मरीजों में होती है, जो पहले से ही किसी गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में एडमिट होते हैं। अगर मामला ज़्यादा गंभीर है, तो मरीज को डायलिसिस या आईसीयू में एडमिट करने की ज़रूरत भी पड़ सकती है। अगर खर्च की बात करें, तो वह बीमारी की गंभीरता, इलाज और अस्पताल में रहने की अवधि पर निर्भर होता है।

Kidney treatment cost

क्रोनिक किडनी (Chronic Kidney)
क्रोनिक किडनी का सीधा मतलब है कि आपकी किडनी खराब है और वह ब्लड को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पा रही। इसका इलाज पांच स्टेज में होता है। पहले चार स्टेज की बात करें, तो इनमें दवा के साथ मरीज की नियमित जांच होती है। साथ ही, 2 से 3 महीने में एक बार ब्लड टेस्ट भी कराना पड़ता है। अगर डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसी वजहों से किडनी खराब हुई है, तो इलाज काफी लंबे वक़्त तक चल सकता है। इसमें हर महीने 10 से 20 हज़ार रुपये खर्च होते हैं।

वहीं, पांचवें स्टेज के मरीजों की किडनी काम करना बंद कर देती है। उसे डायलिसिस या फिर कंप्लीट ट्रांसप्लांट की ज़रूरत होती है।

डायलिसिस की प्रक्रिया
डायलिसिस में मरीज को एक हफ्ते में 2 से 3 सेशन की ज़रूरत होती है। साथ में दूसरी दवाएं भी चलती रहती हैं। इस दौरान मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी काफी घट जाती है। ऐसे में उसे साल में 3-4 बार अस्पताल में भर्ती कराने की भी ज़रूरत पड़ती है। डायलिसिस के दौरान हर सेशन के लिए 3 हज़ार रुपये देने पड़ते हैं। वहीं, हफ्ते में एक बार हीमोग्लोबिन का इंजेक्शन भी लगता है, जिसकी कीमत होती है करीब 14 सौ रुपये। साथ में चलने वाली दवाओं का खर्च महीने में लगभग 5 हज़ार रुपये तक पहुंच जाता है।

Kidney transplant cost

ट्रांसप्लांट कैसे होता है?
किडनी की बीमारी का आखिरी इलाज है ट्रांसप्लांट। प्राइवेट हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट का पैकेज अमूमन 5 लाख रुपये होता है, लेकिन असल में खर्च 7 से 8 लाख रुपये तक पहुंच जाता है क्योंकि किडनी देने वाले का खर्च भी मरीज को ही उठाना पड़ता है। किडनी ट्रांसप्लांट होने पर मरीज को 10 दिन और डोनर को 5 दिन तक अस्पताल में एडमिट रहना पड़ता है। ट्रांसप्लांट से पहले कई टेस्ट करके सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज इसके लिए फिट है या नहीं। इसमें मरीज की किडनी के साथ डोनर की मैचिंग और टेस्टिंग भी की जाती है। इसमें 1 से डेढ़ लाख रुपये लगते हैं।

फिर ट्रांसप्लांट के दौरान कई इंजेक्शन और दवाएं दी जाती हैं, ताकि मरीज का शरीर किडनी को रिजेक्ट न करे। इसमें भी करीब डेढ़ लाख रुपये लग जाते हैं। ट्रांसप्लांट के बाद एक साल तक मरीज को तगड़ी दवाएं दी जाती हैं, ताकि उसकी किडनी सही तरीके से काम करने लगे। इसमें हर महीने 30 से 35 हज़ार रुपये खर्च होते हैं। एक साल बाद दवाओं का डोज कम कर दिया जाता है। फिर हर महीने 10-15 हज़ार रुपये लगते हैं।

आवाज़ : शबनम
*ये लेखक के निजी विचार हैं

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