यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • आईएएस बनने के लिए कैसे करें तैयारी
  • कैसे ये शख्स अपने सपना खोकर कामयाब हो गया?
  • आईएएस बनने के लिए कैसे और कितनी पढ़ाई करें?
  • आईएएस बनने के लिए धैर्यवान होना कितना जरूरी

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कहते हैं कभी-कभी नाकामयाबी भी बहुत बड़ी कामयाबी का रास्ता खोल देती है। कुछ ऐसा ही हुआ साल 2020 में यूपीएससी के परीक्षा में 54वां रैंक लाकर आईएएस बनने वाले मुकुंद ठाकुर के साथ। मुकुंद बिहार के मधुबनी जिले के रहने वाले हैं। मुकुंद बताते हैं कि स्कूल के दिनों में कभी यूपीएससी उनकी प्राथमिकता नहीं रही। वह बचपन से ही आर्मी में भर्ती होना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने पांचवीं कक्षा से ही तैयारी भी शुरू कर दी। मधुबनी के अपने गांव बरुआर से काफी दूर असम के गोलपाड़ा में सैनिक स्कूल में दाखिला लिया। लगातार सात साल तक कठिन तैयारी की। सारे टेस्ट पास किए। लेकिन, जिस टेस्ट की वह ना तो तैयारी कर सकते थे और ना ही उनको उसमें नाकाम होने का थोड़ा भी आभास था, उसी में फेल हो गए और आर्मी में शामिल होकर देश सेवा करने का सपना हमेशा के लिए टूट गया। 17-18 साल की उम्र में लगे इस झटके ने ही उन्हें यूपीएससी के लिए प्रेरित किया और पहले ही प्रयास में आईएएस बन गए।

मुकुंद की यह कहानी बेहद दिलचस्प है। वह बताते हैं कि साल 2015 में सैनिक स्कूल से बारहवीं पास करने के बाद 2016 में नेवी में चयन के लिए उन्होंने परीक्षा दी। परीक्षा पास की और पांच दिन के इंटरव्यू में शामिल हुआ। उस पांच दिनों में 92 प्रतिभागियों में वह अकेला चयनित हुए विशाखापत्तम से। लेकिन आखिरी टेस्ट, जो कि मेडिकल था उसमें अनफिट घोषित कर दिए गए। उनकी आंख में एक बहुत छोटा टिश्यू नहीं बना है। उससे उनकी दृष्टता पर कोई असर भी नहीं है। फिर भी वह अनफिट कर दिए गए और तीनों विंग, मतलब आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में भर्ती के लिए पीआर घोषित कर दिए गए। पीआर मतलब परमानेंट रिजेक्ट। इसका मतलब यह भी कि वह अब कभी भी डिफेंस में नहीं जा सकते थे।

मुकुंद बताते हैं कि यह उनके लिए दिल तोड़ देने वाली घटना थी। अभी 12वीं पास ही किया है और पहले ही मुकाम पर इतना बड़ा झटका। जिस अधिकारी ने उन्हें रिजेक्ट किया था और उनकी फाइनल रिपोर्ट बनाई थी, मुकुंद ने उनको बहुत दुखी होकर कहा कि सर जो चीज मेरे वश में नहीं है। जिसका मुझे कभी आभास भी नहीं था, उसकी वजह से आज मैं रिजेक्ट हो गया। इसमें मेरा क्या कसूर है। मेरा जो देश सेवा का लक्ष्य था वह अब पूरा नहीं हो पाएगा। मैं अब क्या करूं?

Preparation to become IAS

उसी समय 2015 यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट आया था। हर जगह उसी की चर्चा हो रही थी। अखबारों में टॉपर्स के फोटो छपे थे। जिस अधिकारी ने मुकुंद की रिपोर्ट बनाई थी उन्होंने ही मुकुंद से कहा कि तुम यूपीएससी की तैयारी क्यों नहीं करते हो। इसके माध्यम से भी तो देश सेवा कर सकते हो। मुकुंद बताते हैं कि मुझे उस अधिकारी का नाम नहीं पता है। शायद वह एयरफोर्स में किसी बड़े पद पर थे। उनके कहने के बाद ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। बस उस दिन जो मन में ठाना वह अपने पहले ही प्रयास में हासिल कर लिया।

मुकुंद बताते हैं कि इनके साथ जब यह सब हुआ उस समय वह दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज में इंग्लिश ऑनर्स में दाखिला ले चुके थे और फर्स्ट ईयर कंप्लीट कर चुके थे। उनकी मां की इच्छा थी कि मेरा बेटा सरकारी नौकरी करे। मुकुंद बताते हैं कि उनकी मां हमेशा यही कहती थीं कि तुम्हें भले ही ग्रुप-डी की नौकरी मिले, लेकिन सरकारी करो। मैं तुम्हें प्राइवेट नौकरी नहीं करने दूंगी। मुकुंद ने सरकारी नौकरी को ही लक्ष्य लेकर ग्रैजुएशन में इंग्लिश ऑनर्स रखा। मुकुंद तर्क देते हैं कि इंग्लिश ऑनर्स रखने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ज्यादा समय मिल जाता है। वह बताते हैं कि ग्रैजुएशन में अगर आप पूरा नहीं भी पढ़ें तो उसके सारांश पढ़कर आप कोर्स की तैयारी कर सकते हैं। परीक्षा क समय भी कुछ अतिरिक्त मेहनत करके आप अच्छे नंबरों से पास हो सकते हैं।

मुकुंद की यूपीएससी की तैयारी अब शुरू हो चुकी थी। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले यूट्यूब पर विडियोज देखने शुरू किए। मुकुद बताते हैं, ‘मैंने टॉपर्स टॉक काफी देखे। टॉपर्स टॉक मतलब सफलता पा चुके लोगों की बातचीत। अब खुशी है कि मेरा भी विडियो टॉपर्स टॉक पर है। वहां से सुन-सुनकर मैंने तैयारियां शुरू कीं। वहीं से मुझे हिम्मत मिली यूपीएससी की तैयारी करने की। इस दौरान मैंने वैसे लोगों को अपना रोल मॉडल बनाया जिन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीएससी निकाला है। इसके अलावा मेरे लिए समय भी बहुत अनुकूल रहा। यह इस मायने में कि ग्रैजुएशन पूरा करने के बाद भी मैं यूपीएससी में तुरंत नहीं बैठ सकता था क्योंकि तब मैं 21 साल का नहीं हो पाया था। यूपीएससी परीक्षा में बैठने के लिए कम-से-कम 21 साल का होना आवश्यक होता है। मैं तब 18 साल का ही था। इससे मुझे तैयारी करने का पूरा समय मिल गया। इस दौरान क्या हुआ कि मुझे परीक्षा का पैटर्न समझने में ही एक साल लग गया। ऐसा इसलिए कि मैंने कोई कोचिंग जॉइन नहीं किया। जाहिर सी बात है जब आप खुद से तैयारी करते हैं तो इसके लिए रिसर्च वगैरह करना होता है। दूसरा यह कि परिवार या रिश्ते में मुझसे पहले कोई आईएएस थे नहीं कि उनसे पूछकर कोई मदद ले लेता। इस दिशा में टॉपर्स टॉक मेरा सबसे बड़ा मददगार बना। इसके बाद मैंने 2017 से लेकर 2019 तक जमकर तैयारी की।'

Preparation to become IAS

मुकुंद कहते हैं, ‘एक चीज जरूर कहूंगा कि जो कोई भी यूपीएससी की तैयारी करते हैं उन्हें टेस्ट सीरीज जरूर जॉइन करना चाहिए। टेस्ट सीरीज मतलब फाइनल परीक्षा में बैठने से पहले की तैयारी। इसको मॉक टेस्ट भी कहा जाता है। आप परीक्षा सेंटर पर जाने के बाद जो कुछ देखते हैं, मतलब जिस तरह के माहौल में बैठकर आपको परीक्षा देना है, सवाल का पैटर्न किस तरह का होता है, यह सब इसमें बता दिया जाता है। मैं अपना बताऊं कि मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मैं कोचिंग जॉइन कर पाता क्योंकि वहां दो से तीन लाख तक का खर्चा आ जाता है। लेकिन, टेस्ट सीरीज 30 से 35 हजार रुपये में हो जाता है। इतने पैसे की तो लोग कहीं ना कहीं से व्यवस्था कर ही लेते हैं।

तैयारी में मुकंद के अलावा इनके चार और साथी भी थे जो कि सभी पांडव नगर में एक किराए के घर में रहते थे। हालांकि इन पांच में से अभी केवल मुकुंद ही सफल हो पाए हैं। लेकिन, मुकुंद बताते हैं कि बाकी चार भी जल्दी यूपीएससी क्लियर कर लेंगे क्योंकि एक-दो नंबर से रह जा रहे हैं। मुकुंद एक चीज और जो बेहद अहम बताते हैं वह यह कि यूपीएससी की परीक्षा में किताबी ज्ञान के साथ ही आपकी सहनशीलता और धैर्य की भी परीक्षा होती है। क्या होता है कि दो साल तक 10 घंटे पढ़ने के बाद भी आपको पता नहीं होता है कि होगा कि नहीं होगा। ऐसे में धैर्य बहुत जरूरी होता है। कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने एक साल की तैयारी में ही निकाल लिया। लेकिन, मैं नहीं मानता। कम से कम दो साल तो इसकी तैयारी के लिए पूर्ण समर्पण के साथ चाहिए ही चाहिए। मैं तो गारंटी के साथ कहता हूं कि कोई भी बच्चा अगर दो साल 8 से 10 घंटे तक कड़ी मेहनत के साथ तैयारी कर ले तो वह यूपीएससी निकाल सकता है।

Preparation to become IAS

मुकुंद के पापा एक साधारण किसान हैं। खेती ही उनकी आमदनी का मुख्य जरिया है। कुछ दिन के लिए उन्होंने घर पर ही दवाई की दुकान भी चलाई। मां सरकारी स्कूल में शिक्षक थीं लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए महज चार साल नौकरी करने के बाद इस्तीफा दे दिया। वह मुकुंद और उनसे बड़ी तीन बहनों को लेकर मधुबनी आ गईं। मुकुंद तो हालांकि जब पांचवीं में थे तभी असम के सैनिक स्कूल में चले गए, लेकिन मां ने तीनों बहनों को मधुबनी में रखकर पढ़ाया। मुकुंद बताते हैं कि मैं संयुक्त परिवार में पला-बढ़ा हूं जिसमें मेरे पापा और चाचा सब मिलाकर कुल 22 पुरुष सदस्य थे। किसी को भी सरकारी नौकरी नहीं थी। इन सबके बीच मां ने सरकारी नौकरी हासिल की, लेकिन हम भाई-बहनों को अधिक से अधिक समय देने के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। यही वजह थी कि वह मुझे सरकारी नौकरी में देखना चाहती थीं।

मुकुंद का बचपन अभाव में बीता है। वह बताते हैं, ‘भले ही पापा की आर्थिक स्थिति बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी लेकिन मुझे याद नहीं है कि हम भाई-बहनों ने कभी उनसे कुछ मांग की हो और उन्होंने उसे पूरा नहीं किया हो। वह हमारे लिए हमेशा तैयार रहते थे। तीन बेटियों की शादी करना आज के समय में बेहद खर्चीला होता है। खासकर एक किसान के लिए। मैं इस बात को जानता था इसलिए यूपीएससी की तैयारी के लिए कभी भी कोचिंग को प्राथमिकता नहीं दी।' मुकुंद एक घटना को यादकर आगे कहते हैं, ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान एक बार मैं गर्मी की छुट्टियों में गांव गया हुआ था। एक दिन काफी तेज बारिश हुई। मेरे घर की छत टीन की थी। बारिश में मेरा घर पानी से भर गया। मैंने कोनिया, जिसमें अनाज चुना जाता है। उससे घर से पानी निकाला और रोने लगा। यह 2017 की बात है। उस दिन मुझे गरीबी का अहसास हुआ और मेरे मन में आया कि घर की स्थिति को सुधारने के लिए मुझे कुछ अच्छा करना होगा।‘

आवाज़ : शबनम

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Who is Mukund Kumar IAS? | Mukund of Madhubani cracks UPSC exam in first attempt | How to Clear UPSC exam - tips in hindi | जानिए किसान के बेटे मुकुंद की सफलता की कहानी | 22 साल की उम्र में UPSC परीक्षा पास | UPSEC EXAM PREPRATION |

(Hindi podcast on Navbharat Gold)

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