यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • मेंस्ट्रुअल कप के बारे में जानने के लिए
  • इसका बाज़ार तेज़ी से क्यों बढ़ रहा है?
  • क्या कप का इस्तेमाल सुरक्षित है?
  • क्या कप जल्द ही पैड की जगह ले लेगा?

use of menstrual cup in india: केरल के कोट्टायम के एक कॉलेज में पढ़ाने वाली फियोना जोशी ने मेंस्ट्रुअल कप के बारे में पहली बार साल 2018 में सुना। वह छुट्टियां मनाने कुवैत गई थीं। वहीं, उनकी एक सहेली ने उन्हें मेंस्ट्रुअल कप के बारे में बताया, जो ख़ुद उसका इस्तेमाल कर रही थीं। 44 साल की फियोना ने कप को लगाया, तो उन्हें काफी सुविधाजनक लगा। वह कहती हैं, 'अब मैं दोबारा सैनिटरी पैड का इस्तेमाल करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। '
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दिल्ली की एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट दिविजा भसीन भी मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग करती हैं। 25 साल की दिविजा बताती हैं कि उन्हें एक यूट्यूब विडियो से इसके बारे में पता चला। इसका इस्तेमाल भी काफी आसान है। इस कप को प्राइवेट पार्ट के अंदर डाला जाता है। वहां यह मासिक धर्म वाले ब्लड को इकट्ठा करता है और फिर इसे निकालकर साफ़ किया जाता है। सैनिटरी पैड जहां एक ही बार इस्तेमाल होता है, वहीं मेंस्ट्रुअल कप को साफ़ करके फिर से काम में लाया जा सकता है।

दिविजा का कहना है कि वह सबसे पहले तो यही जानना चाहती थीं कि यह काम कैसे करता है। उन्हें लगा कि यह 'थोड़ा अजीब' लग सकता है। लेकिन, जब चार साल पहले उन्होंने इसका इस्तेमाल करना शुरू किया, तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिविजा बताती हैं, 'अगर ईमानदारी से कहूं, तो इसने मेरे मासिक धर्म के पूरे अनुभव को बदल दिया। मैंने अपने अनुभव को बेहतर करने के लिए कई तरीकों को अपनाया, लेकिन तलाश मेंस्ट्रुअल कप पर ही जाकर ख़त्म हुई।'

Menstrual cup

मेंस्ट्रुअल कप दशकों से ग्लोबल मार्केट में है। भारत में इसका चलन करीब सात साल पहले शुरू हुआ। पहले मेंस्ट्रुअल कप को एक ख़ास तबके ने अपनाया, जो मासिक धर्म जैसी चीज़ों को लेकर काफी जागरूक था। लेकिन, अब फियोना और दिविजा जैसे ग्राहकों की वजह से मेंस्ट्रुअल कप बनाने वाली कंपनियों की बिक्री लगातार बढ़ रही है।

2017 में मेंस्ट्रुअल कप लॉन्च करने वाली कंपनी सिरोना हाइजीन के फाउंडर दीप बजाज बताते हैं, 'पिछले तीन साल में इस प्रॉडक्ट को लोगों ने जमकर खरीदा है। इसकी बिक्री करीब 100 प्रतिशत सालाना के हिसाब से बढ़ रही है। पैड या टैम्पोन का उपयोग करने वाली बहुत-सी महिलाएं स्विच करने के लिए तैयार हैं। जो भी मेंस्ट्रुअल कप को एक बार ट्राई करता है, दोबारा किसी और प्रॉडक्ट के बारे में नहीं सोचता।'

पी सेफ के को-फाउंडर विकास बगरिया की बातों से भी जाहिर होता है कि मेंस्ट्रुअल कप का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। उनकी कंपनी की बिक्री जनवरी 2020 से करीब 15 गुना बढ़ चुकी है। बगरिया और बजाज, दोनों का कहना है कि उनकी फर्म 10 लाख से अधिक कप बेच चुकी है। बूंद 2016 में मेंस्ट्रुअल कप लॉन्च करने वाली शुरुआती कंपनियों में से एक है। इसकी को-फाउंडर सोनल जैन कहना है कि आज कम से कम 14 नई कंपनियां पीरियड कप बना रही हैं।

मेंस्ट्रुअल कप की बढ़ती लोकप्रियता की पुष्टि ईकॉमर्स प्लैटफॉर्म एमेजॉन भी करती है। एमेजॉन इंडिया में कोर कंज्यूमेबल्स के डायरेक्टर निशांत रमन कहते हैं, 'महिलाएं इंटीमेट हाइजीन प्रॉडक्ट्स को लेकर काफी जागरूक हो रही हैं। ऐसे में इन प्रॉडक्ट्स की डिमांड भी तेज़ी से बढ़ रही है। मेंस्ट्रुअल कप के मार्केट में अपार संभावनाएं हैं। हमारे प्लैटफॉर्म पर दो साल के भीतर इसकी बिक्री ढाई गुना बढ़ गई।'

Alternatives to sanitary pads

जब भी किसी ऐसे प्रॉडक्ट का विकल्प पेश किया जाता है, जिसका इस्तेमाल लोगों की आदतों में शुमार हो चुका है, तो उसके लिए ग्राहक खोजने में काफी मुश्किल होती है। अगर प्रॉडक्ट मासिक धर्म से जुड़ा हो, तो मुश्किल और भी ज़्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि आज भी समाज में इसे लेकर कई मिथक और ग़लत धारणाएं हैं। हालांकि मेंस्ट्रुअल कप बेचने वाली कंपनियों का कहना है कि डिजिटलीकरण के चलते उन्हें अपना प्रॉडक्ट बेचने में काफी मदद मिल रही है। उनका प्रॉडक्ट चूंकि टिकाऊ और सुविधाजनक है, तो इसे इस्तेमाल करने वाले अपने जान-पहचान वालों को भी बता रहे हैं, जैसे कि फियोना को उनकी सहेली ने बताया था।

सिरोना के बजाज कहते हैं, 'डिजिटल मीडिया की मदद से आप अपने ग्राहकों तक आसानी से पहुंच सकते हैं। अब आपको सिर्फ प्रिंट या टीवी विज्ञापनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।' कुछ कंपनियों ने तो बाकायदा विडियो और ऑनलाइन सर्विस भी शुरू की है, ताकि ग्राहकों की आशंकाओं को दूर किया जा सके। मेंस्ट्रुअल कप सात पहले करीब एक हज़ार रुपये का आता था। तब इसे महंगा विकल्प माना जाता था। नया प्रॉडक्ट होने की वजह लोगों में थोड़ी हिचक भी थी। लेकिन, अब यह करीब साढ़े तीन सौ रुपये में उपलब्ध है। एक कप कम से कम 5 साल तक चलता है, ऐसे में यह काफी किफायती विकल्प भी हो जाता है।

मेंस्ट्रुअल कप की डिमांड बढ़ाने में कोरोना महामारी की भी अहम भूमिका रही। लॉकडाउन की वजह से हर कोई घर में ही था। ऐसे में मेंस्ट्रुअल कप को आजमाने और उसके हिसाब से ढलने के लिए महिलाओं को पर्याप्त मौका मिल गया। पहले लॉकडाउन के दौरान कई स्वास्थ्यकर्मियों ने पीपीई किट को हटाने से बचने के लिए कप का इस्तेमाल शुरू किया, क्योंकि कप को पैड के मुकाबले 10-12 घंटे तक अधिक समय तक पहना जा सकता है।

Menstrual cup

द पैड प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की निदेशक तान्या महाजन का कहना है कि ग्रामीण इलाक़ों में बहुत-सी महिलाओं ने एनजीओ के ज़रिए कप लगाना शुरू कर दिया था, जब पैड आसानी से उपलब्ध नहीं थे। यह कप ख़ासकर आशा कार्यकर्ताओं को काफी सुविधाजनक लगा, क्योंकि वे इसे 6 घंटे से अधिक वक़्त पहन सकती थीं। तान्या डिवेलपमेंट सॉल्यूशंस इंक और यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल की स्टडी में भी शामिल थीं। इसमें पता चला कि कप में स्विच करने की वजह आमदनी के हिसाब से अलग-अलग थी। ग्रामीण महिलाओं के लिए मेंस्ट्रुअल कप का मतलब था कि उन्हें अब यह चिंता करने की ज़रूरत नहीं कि वे सैनेटिरी पैड को इस्तेमाल के बाद कहां फेकेंगी। इसे आज भी ग्रामीण इलाक़ों में टैबू माना जाता है। वहीं, शहरों में महिलाएं इसे आरामदायक और इको-फ्रेंडली होने के चलते इस्तेमाल करती हैं।

हालांकि, तमाम सहूलियतों के बावजूद ऐसा नहीं है कि यह पैड की जगह लेने के करीब है। अब भी मार्केट में पैड का ही दबदबा है। मेंस्ट्रुअल कप की राह में कई अड़चनें भी हैं। मिसाल के लिए, इससे जुड़ी एक ग़लत धारणा यह है कि कप को प्राइवेट पार्ट के अंदर डालने से वर्जिनिटी पर असर पड़ता है। भारत जैसे रूढ़िवादी समाज में यह बात काफी मायने रखती है। फिर कुछ लोगों को यह भी लगता है कि इसे हटाने में दिक्कत हो सकती है या फिर यह अंदर भी जा सकता है। मेंस्ट्रुअल कप बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि हमसे भी ग्राहक अक्सर इसी तरह के सवाल पूछते हैं और हम उन्हें हमेशा आश्वस्त करते हैं कि हमारा प्रॉडक्ट पूरी तरह से सुरक्षित है।

आवाज़ : सरोज

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