यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • एक्सपर्ट से जानें कि किन वजहों से होता है लिवर खराब?
  • लिवर की निगरानी के लिए कौन से टेस्ट कराएं?
  • 5 ग़लतियां, जिनसे लिवर कमजोर होता है
  • किन चीज़ों की लत बिगाड़ सकती है लिवर की सेहत?

Liver damage Cause in Hindi: कुदरत ने हमारे शरीर में दिल और जिगर को ही एक बनाया है। बाकी किडनी, फेफड़े, आंखें जैसे अंग दो दिए हैं। ऐसे में दिल के साथ जिगर की देखभाल भी बहुत ज़रूरी है। हम अक्सर दिल को याद रखते हैं, लेकिन जिगर यानी लिवर को भूल जाते हैं।

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वो 5 ग़लतियां, जिनसे लिवर कमजोर होता है
1. लिवर की पसंद को भूल जाना
हम फाइबरयुक्त चीज़ों को कम खाते हैं। जितनी खाएंगे, उतना ही फायदा होगा। मौसमी फल और सब्जियों जैसे- संतरा, अमरूद, गाजर, पालक, साग आदि ज़्यादा खाएं।

2. विटामिन C कम लेना
यह डोज दवा के रूप में नहीं, कुदरती होनी चाहिए। एक नींबू का रस एक गिलास पानी में मिलाकर लें या एक संतरे का रस या एक आंवला या एक प्लेट अन्नानास रोज लेना चाहिए। इससे विटामिन-सी की कमी नहीं होती।

3. डिटॉक्सिफिकेशन को ज़्यादा अहमियत न देना
हमारे खाने में अगर कोई हानिकारक चीज़ है, तो वह लिवर में भी जमा हो जाती है। हानिकारक चीज़ों को बाहर निकालने का एक बड़ा ही आसान तरीका है डिटॉक्सिफिकेशन। हम इसे भूल जाते हैं। इसके लिए सुबह खाली पेट एक गिलास सामान्य पानी या एक गिलास गुनगुने पानी में एक नीबू निचोड़कर पी लें। अगर ज़्यादा फायदा चाहिए, तो रात में किसी शीशे के जार में 2 लीटर पानी में 2 नीबूओं को छिलके समेत काटकर डाल दें। साथ में खीरा भी डाल सकते हैं। सुबह छान लें, फिर इसे दिनभर पीते रहें।

4. ग़लत चीज़ों की आदत लगाना
शराब, पैक्ड फूड, स्टोर करके रखे जाने वाले नॉनवेज आइटम्स आदि से दूरी रखनी चाहिए। इन्हें स्टोर करने या इनकी लाइफ बढ़ाने के लिए जिन रसायनों (मसलन फॉर्मलिन : मरने के बाद इंसानी शरीर को लंबे समय तक सही रखने के लिए इस्तेमाल होता है) का इस्तेमाल होता है, वे लिवर के लिए बहुत ज़्यादा हानिकारक होते हैं।

5. फिजिकल एक्टिविटी को नज़रअंदाज़ करना
लिवर को मजबूत बनाने में एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टिविटीज का अहम रोल होता है। हर दिन 45 मिनट की फिजिकल एक्टविटीज से फैटी लिवर की स्थिति से हमारी दूरी बन जाती है। प्राणायाम भी ज़रूरी है। हर दिन 10 से 15 मिनट का प्राणायाम काफी काम आता है। अगर योग में दिलचस्पी है, तो उसे भी ज़रूर करें। सीधे कहें तो पेट को टमी न बनने दें। अमूमन इन बातों को हम भूल जाते हैं।

Liver Health

आजकल डिप्रेशन आम है। डिप्रेशन के कारण कई तरह की परेशानियां जैसे- शुगर, बीपी, मोटापा आदि घेरने लगती हैं। कई लोगों को तो शराब की लत भी लग जाती है। कई बार उस शख़्स का कोई भी काम करने में मन नहीं लगता। ऐसा अगर किसी भी शख़्स के साथ हो, तो समझिए कि उसकी तमाम समस्याओं के साथ उसके लिवर पर भी ख़तरा मंडराने लगा है। लिवर हमारी सभी नादानियों और बदमाशियों को तब तक नहीं बताता, जब तक कि वह 70 से 80 फ़ीसदी तक ख़राब न हो जाए। इसलिए हम भी उस पर तब तक ध्यान नहीं देते, जब तक कि वह अपने हाथ खड़े न कर दे। कई बार तब तक देर हो जाती है। इसलिए लिवर यानी जिगर को अपना जिगरी समझें, न कि उसे नज़रअंदाज़ करते रहें।

लिवर क्यों है ख़ास?
लिवर शरीर का इकलौता ऐसा हिस्सा है, जो 300 से भी ज़्यादा तरह के काम करता है। यह काम वह दिन में एक बार नहीं, कई-कई बार करता है। इसके काम में खून बनाने, इम्यूनिटी मजबूती, पाचन संबंधी अहम हैं। अब यह हम पर है कि हम उसे उसके काम में ताजे फल और सब्जियों को खाकर मदद करते हैं या फिर शराब, पैक्ड फूड आदि से रुकावट पैदा करते हैं। यह शरीर के उत्सर्जी अंग (हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने वाला) के रूप में भी काम करता है। लिवर शरीर से हानिकारक और जहरीले पदार्थों को पित्त (बाइल) के रूप में छानकर शरीर से अलग करता है। स्टूल का भूरा रंग भी पित्त की वजह से होता है। लिवर का वजन इंसानी शरीर के वजन का लगभग 1.5 से 2 फ़ीसदी तक होता है। अगर किसी शख़्स का वजन 70 किलोग्राम है, तो उसके लिवर का वजन 1050 से 1400 ग्राम तक हो सकता है। अगर वजन इससे ज़्यादा है, तो हो सकता है लिवर में इंफेक्शन हो या फिर सूजन।

किडनी या फेफड़ों से अलग लिवर ख़ुद को छोटे से बड़ा बना सकता है। इसे रीजेनरेशन पावर भी कहते हैं। इसके लिए शरीर में कम से कम 25 फ़ीसदी असल लिवर का मौजूद रहना ज़रूरी है। इसे मूल स्वरूप में लौटने के लिए अमूमन 2 से 3 हफ्तों की ही ज़रूरत होती है। यह शरीर में ग्लूकोज को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। अगर किसी को फैटी लिवर है, तो वह अमूमन टाइप 2 डायबीटीज का मरीज भी हो सकता है। इतना ही नहीं, लिवर विटामिनों का भंडारण भी करता है। A,D,E,K ये वसा में घुलने और पचने वाले विटामिन हैं। लिवर में 5 फ़ीसदी से कम वसा रहना भी ज़रूरी है, ताकि इन विटामिनों को शरीर सही तरीके से जज्ब कर सके।

Alcohol is dangerous for the liver

लिवर में खराबी की बड़ी वजहें
शराब का सहारा :
भले ही लोग शराब पीने के बहाने ढूंढते हों। शराब का सहारा लेकर अपने गम को दूर करने की बात करते हों, लेकिन लिवर के लिए शरीर में शराब की मौजूदगी ही ख़तरनाक है।

मोटापे से यारी : वैसे तो मोटापा कई दूसरी बीमारियों के लिए बहुत ख़तरनाक है, लेकिन लिवर के मामले में यह ज़्यादा हो जाता है। ऐसा नहीं है कि लिवर को फैट बिलकुल भी पसंद नहीं। लिवर को उसके वजन का 5 फ़ीसदी तक ही फैट पसंद है। फैट की मात्रा अगर इससे ऊपर चली जाए, तो समस्या पैदा हो जाती है। यह जितनी बढ़ती जाएगी, लिवर की परेशानी भी बढ़ती जाएगी।

शुगर और बीपी की समस्या : वैसे तो शुगर की समस्या पैन्क्रीअस से जुड़ी हुई है, क्योंकि यही इन्सुलिन बनाता है। लेकिन, शुगर अगर कुछ अंगों को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है, उनमें से लिवर भी एक है। अगर किसी को शुगर है, तो उसे लिवर का भी ज़रूर ख्याल रखना चाहिए। हर छह महीने पर LFT का टेस्ट ज़रूर कराना चाहिए। साथ ही किसी डॉक्टर के संपर्क में भी ज़रूर रहना चाहिए। वहीं, बीपी को काबू में रखना भी ज़रूरी है।

लिवर का इन्फेक्शन : लिवर की परेशानी बढ़ाने में इसका भी खासा रोल होता है। हेपेटाइटिस के वायरस के 5 स्ट्रेन होते हैं- A,B,C,D और E। इनकी वजह से लिवर में जलन और इंफेक्शन होता है। कई बार हेपेटाइटिस के चलते ही लिवर में फाइब्रोसिस की परेशानी हो जाती है। इस परेशानी का पता लगाने के लिए ही लिवर फाइब्रोसिस टेस्ट कराया जाता है।

ग़लत खानपान : लिवर को आहिस्ता-आहिस्ता नुकसान पहुंचाने में ग़लत खानपान भी शामिल है। शराब एक बड़ा कारण ज़रूर है लिवर को नुकसान पहुंचने का, लेकिन ऐसे मामले भी कम नहीं हैं, जब शख़्स कोई नशा नहीं करता था, फिर भी उसे लिवर की परेशानी हो गई। पहले फैटी लिवर हुआ। खानपान का ध्यान नहीं रखा, तो 15 से 20 साल के बाद 70 फ़ीसदी से ज़्यादा लिवर ख़राब हो गया और वह लिवर सिरोसिस (लिवर इतना खराब हो जाए कि लिवर ट्रांसप्लांट ही उपाय बचे) में बदल गया। यहां से लिवर की वापसी बहुत ही मुश्किल हो जाती है।

पेनकिलर दवाएं हैं कलेजे की कातिल : जब दवा ही दर्द देने लगे तो क्या करें? हम कहते हैं ऐसी दवा से दूरी बना लें या फिर जितना कम हो उतना ही लें। पेनकिलर्स ऐसे ही मर्ज यानी दवा हैं, जो फौरी तौर पर भले ही हमें दर्द से राहत देते हैं, लेकिन ये हमारे लिवर के लिए बहुत ही ख़तरनाक हैं। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी पेनकिलर्स न लें।

Liver Diseases

लिवर के टेस्ट
अगर किसी के परिवार में शुगर, बीपी आदि की परेशानी है, तो उसे हर 6 महीने में एक बार टेस्ट ज़रूर कराना चाहिए। वैसे तो लिवर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं, यह देखने के लिए
कई तरह के टेस्ट होते हैं। कुछ अहम टेस्ट है:

LFT: इसे लिवर फंक्शन टेस्ट भी कहते हैं। लिवर के काम को जांचने के लिए सबसे कॉमन टेस्ट यही है। इस टेस्ट को कराकर देखते हैं कि फैटी लिवर की क्या स्थिति है।

Serum Albumin: जब लिवर से बना प्रोटीन एल्बुमिन का लेवल खून में कम होने लगता है, तब इस टेस्ट से ही पता चलता है कि लिवर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं।

Liver Fibrosis: इस टेस्ट को लिवर का गोल्डन टेस्ट भी कहते हैं। यह अल्ट्रासाउंड तकनीक पर आधारित है। इससे लिवर को हो चुके नुकसान के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है।

आवाज़ : शबनम

Web Title:

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(Hindi podcast on Navbharat Gold)

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