यह आलेख क्यों पढ़ें?

  • हार्ट डिजीज और उसके इलाज के बारे में जानने के लिए
  • हृदय रोग क्यों होते हैं, इलाज में कितना खर्च होता है?
  • इलाज कैसे होता है, किस कंडीशन में होती है हार्ट सर्जरी?
  • हार्ट डिजीज से बचने के लिए क्या उपाय करने चाहिए?

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दिल्ली में रहने वाले हरीश की ज़िंदगी में सबकुछ सही चल रहा था। उनका खानपान और रहन-सहन काफी अच्छा था। 45 साल की उम्र में भी वह काफी फिट नज़र आते। लेकिन, उनके सीने में कभी-कभार हल्का दर्द उठता था। वह अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर देते। लेकिन, एक दिन अचानक दर्द काफी बढ़ गया। घरेलू उपाय से आराम न हुआ, तो अस्पताल में एडमिट कराना पड़ा। डॉक्टरों ने जांच की और बताया कि हरीश के हार्ट वॉल्व में सूजन है। इलाज शुरू हुआ और चूंकि बीमारी काबू से बाहर नहीं हुई थी, तो उन्हें जल्द आराम भी हो गया। पैसों की थोड़ी दिक्कत हुई, लेकिन दोस्तों और रिश्तेदारों से उधार लेकर काम चल गया।
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हरीश की कहानी से पता चलता है कि गंभीर बीमारियां कभी बताकर नहीं आतीं। वह अच्छे खासे सेहतमंद दिखने वाले शख़्स को भी हो सकती हैं। कई सेलिब्रिटी और ऐक्टर भी हार्ट से जुड़ी बीमारियों के चलते कम उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह गए। इस तरह के रोग अमूमन बढ़ती उम्र और खराब लाइफस्टाइल के चलते होते हैं। इस तरह की ज़्यादातर बीमारियों का इलाज उपलब्ध है, लेकिन उसके लिए मर्ज का शुरुआत में ही पकड़ में आना ज़रूरी है। जितनी ज़्यादा देर होगी, ख़तरा और इलाज का खर्च उतना ही बढ़ेगा। आइए समझते हैं कि हृदय रोग यानी कार्डियोवैस्कुलर क्या होता है और क्या है इसका इलाज :

क्या होती है कार्डियोवस्कुलर डिजीज?
कार्डियोवस्कुलर डिजीज (Cardiovascular disease) यानी हार्ट डिजीज में हृदय और खून की नलियां (Artery and vein) प्रभावित होती हैं। यह बीमारी काफी घातक होती है। साल 2019 में करीब 1 करोड़ 80 लाख यानी 32 फ़ीसदी मौतें हार्ट डिजीज से हुईं। भारत की बात करें, तो यहां करीब 25 फ़ीसदी लोगों ने हृदय रोग के चलते जान गंवाई।

Why Are Heart Attacks on the Rise in Young People

कितनी तरह के होते हैं हृदय रोग?
हार्ट डिजीज कई तरह के होते हैं। भारत में कोरोनरी, सेरेब्रोवस्कुलर और रूमेटिक जैसे हृदय रोग होते हैं। मैक्स अस्पताल के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉक्टर विनय कुमार बहल बताते हैं, 'भारत में कोरोनरी आर्टरी की बीमारी अमूमन अमीर तबके में दिखती है। वहीं, रुमैटिक हार्ट डिजीज ज़्यादातर कम आमदनी वाले लोगों को शिकार बनाती है।' पहले कोरोनरी डिजीज 40 साल के ऊपर के लोगों में नज़र आती थी, लेकिन अब नई उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आने लगे हैं।

हार्ट से जुड़ी दिक्कतों की वजह क्या है?
हृदय रोग कई वजहों से होता है। फास्ट फूड या ज़्यादा तला-भुना खाने वालों में हार्ट से जुड़ी दिक्कतें ज़्यादा होती हैं। खराब लाइफस्टाइल यानी खानपान और सोने का समय तय न होना भी इसकी एक बड़ी वजह है। उम्रदराज लोगों को दूसरी बीमारियों के चलते भी दिल से जुड़ी बीमारियां हो जाती हैं। अगर युवाओं की बात करें, उन्हें हार्ट अटैक जैसी समस्या अमूमन तनाव की वजह से होती है। करियर, फैमिली और रिलेशनशिप जैसी चीज़ों को लेकर युवा काफी परेशान रहते हैं, जिसका अंजाम आखिर में हार्ट डिजीज के रूप में निकलता है।

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अब बात ट्रीटमेंट और खर्चे की
हार्ट डिजीज में डॉक्टर की परामर्श फीस हज़ार से डेढ़ हज़ार रुपये होती है। अगर डॉक्टर को मरीज के भीतर किसी तरह के लक्षण दिखते हैं, तो वह टेस्ट की सलाह देता है। एंजियोग्राफी टेस्ट सात हज़ार से बीस हज़ार रुपये में होता है। इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, इकोकार्डियोग्राम और कार्डियक एमआरआई जैसे दूसरे टेस्ट का खर्च 10 से 25 हज़ार रुपये के बीच है।

इतने टेस्ट के बाद जाहिर हो जाता है कि बीमारी कितनी गंभीर है और इलाज में कितनी रकम लगेगी। फिर कार्डियोलॉजिस्ट मेडिकेशन या फिर सर्जरी की सलाह देगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी बीमारी कितनी गंभीर है। अगर दिल को ज़्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है तो डॉक्टर दवा लेने की सलाह देंगे। मेडिकेशन का खर्च अमूमन इस बात पर निर्भर करता है कि दवा कब तक चलेगी, डोज क्या होगी, दवाएं ब्रैंडेड होंगी या जेनेरिक।

अगर बीमारी गंभीर होती है और एंजियोप्लास्टी (स्टेंट इम्प्लांटेशन) करना पड़ता है, तो ढाई से 4 लाख रुपये लग सकते हैं। ड्यूल चेम्बर पेसमेकर लगाने की स्थिति में तीन लाख रुपये खर्च होते हैं। अगर बात बाईपास सर्जरी तक पहुंचती है, तो 4 से 5 लाख रुपये तक लगते हैं। अगर वॉल्व खराब हो गया, तो उसके रिप्लेसमेंट का खर्च 5 से 6 लाख रुपये मानकर चलिए।

Types of heart disease

इलाज के बाद का खर्च
सर्जरी के बाद मरीज का काफी ध्यान रखना पड़ता है। सही तरीके से रिकवर करने के लिए लंबे वक़्त तक दवा चलती है और इसका खर्च डेढ़ से दो हज़ार रुपये महीना हो सकता है। फिर हर तीसरे महीने ब्लड टेस्ट करना पड़ता है, जिसके लिए एक से दो हज़ार रुपये देने पड़ते हैं। इकोकार्डियोग्राम का खर्च 2 से 4 हज़ार रुपये सालाना तक हो सकता है।

दिल की सेहत का कैसे रखें ख्याल?
हार्ट से जुड़ी बीमारियां काफी घातक होती हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि आप एहतियात बरतें, ताकि ये बीमारियां आपको अपना शिकार न बनाएं। दिल को सेहतमंद रखने के लिए आपको हर दिन हल्की फुल्की एक्सरसाइज ज़रूर करनी चाहिए। आप मानसिक शांति के लिए योग की भी मदद ले सकते हैं। खाने में जितना हो सके, फल और हरी सब्जियों को शामिल करना चाहिए। बाहर के खाने से परहेज आपके दिल को सेहतमंद रखने में मदद करेगा। साथ ही, 30 साल के बाद नियमित तौर पर हेल्थ चेकअप कराना चाहिए, ताकि शुरुआती स्टेज में ही बीमारी का इलाज किया जा सके।

आवाज : सरोज

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